/सीबीआई से केस वापस लेने के लिए बेकरार होने वाले पहले मुख्यमंत्री हैं सुक्खू : जयराम ठाकुर

सीबीआई से केस वापस लेने के लिए बेकरार होने वाले पहले मुख्यमंत्री हैं सुक्खू : जयराम ठाकुर

शिमला, 10 अक्तूबर,
हिमनयन न्यूज/ ब्यूरो/वर्मा।

हिमाचल के नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह देश के ऐसे पहले मुख्यमंत्री हैं जो किसी मामले की जांच सीबीआई से वापस लेने के लिए बेकरार हैं।

यहां जारी प्रेस ब्यान में उन्होंने कहा कि एचपीपीसीएल के इंजीनियर विमल नेगी की मौत के मामले में सरकार की बेचैनी इस बात का संकेत है कि इस घटना से जुड़े तार बहुत गहरे और सत्ता से जुड़े हुए हैं।

जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार की यह बेताबी साफ दर्शाती है कि इस मामले में कई बड़े लोगों की संलिप्तता है और जेल बहुत से लोगों का इंतजार कर रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पहले सीबीआई जांच की मांग कर रही थी और अब वही सरकार उसे वापस लेने के लिए सिर के बल खड़ी है, जिससे उसकी मंशा पर गंभीर सवाल उठते हैं।

उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में यह पहला अवसर है जब किसी राज्य सरकार ने न्यायालय द्वारा आदेशित सीबीआई जांच में सहयोग करने के बजाय उसे बाधित करने की कोशिश की है।

जयराम ठाकुर ने सवाल उठाया कि आखिर विमल नेगी की मौत के मामले में कौन-कौन फंस रहा है, जिसके चलते पूरी सरकार जांच से पीछे हट रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अपने कुछ अधिकारियों को कानून की धज्जियां उड़ाने की खुली छूट दे रहे हैं, जिससे अब संदेह का दायरा खुद मुख्यमंत्री तक पहुँच गया है।

जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि थाने में मौजूद पुलिस कर्मियों ने विमल नेगी की पेन ड्राइव को फॉर्मेट कर सबूत मिटाने की कोशिश की, जो जांच से छेड़छाड़ का स्पष्ट प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि इस कृत्य में शामिल एक पुलिस कर्मचारी जेल में है, लेकिन सरकार अब भी जांच को मोड़ने में जुटी है। उन्होंने कहा कि पुलिस जिस जांच पर सवाल उठा रही है, वह माननीय उच्च न्यायालय की देखरेख में चल रही है, और ऐसे में सीबीआई की कार्यवाही पर सवाल उठाना न केवल न्याय प्रक्रिया बल्कि न्यायपालिका पर भी प्रश्न खड़ा करता है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विमल नेगी के परिवार ने शुरू से ही उनके गायब होने और मौत के संबंध में संदेह व्यक्त किया था तथा सीबीआई जांच की मांग की थी। परिवार को न्याय पाने के लिए कैंडल मार्च और न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने विधानसभा में जांच का भरोसा दिया था, परंतु अब वही सरकार सीबीआई जांच से बचने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।

जयराम ठाकुर ने कहा कि यह पूरा प्रकरण सरकार की न्याय प्रक्रिया में हस्तक्षेप और व्यवस्था पतन का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और उनके संरक्षण में कार्य कर रहे अधिकारी इस मामले में पारदर्शिता से बच रहे हैं।

उन्होंने कहा कि “विमल नेगी की मौत में दाल में काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली नजर आ रही है,” और यह साफ है कि सच्चाई को छिपाने की कोशिश की जा रही है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री और उनके सहयोगी भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के जाल में फंस चुके हैं और जनता जल्द ही इसका जवाब देगी।

उन्होंने कहा कि “अब समय आ गया है कि व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर चल रहा व्यवस्था पतन का यह दौर समाप्त हो और सच्चाई सामने आए।”