/जीव का स्वयं को सत्य मान लेना ही उसके पतन का कारण बनता है – आयार्च तिलक राज शर्मा ।

जीव का स्वयं को सत्य मान लेना ही उसके पतन का कारण बनता है – आयार्च तिलक राज शर्मा ।

खडकयाली में श्रीमद भागवत कथा वाचन के समय श्रोताओ को दिया उपदेश ।
सोलन( अर्की )22 फरवरी,.
हिम नयन न्यूज /ब्यूरो/ नयना वर्मा

सोलन जिले के अर्की उपमण्डल के खड़कयालीय( पंच पीपलू )डाकखाना भूमती में स्थानीय निवासी लेख राम चौधरी के सौजन्य से आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन भी श्रोताओ की भीड लगी रही ।मिली जानकारी के मुताबिक इस श्रीमद् भागवत कथा में आचार्य तिलक राज शर्मा द्वारा श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन श्रोताओ को बताया कि सत्य स्वरूप भगवान अपनी माया से सबको मोहित कर देते हैं और उनके माया से मोहित होने से वही जीव बच सकता है जो भगवान की भक्ति में लीन रहता है। आयार्च तिलक राज शर्मा ने श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि इस ब्रहमाण्ड में जीव स्वयं को सत्य मान लेता है और वही जीव के पतन का कारण बनता है उन्होंने श्रोताओं को समझाया कि जीव को पतन से बचने के लिए सत्य स्वरूप भगवान की भक्ति में और श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा की कथा श्रवण करने से भगवान प्रसन्न होते हैं और मानव को भगवान की प्राप्ति करने का मार्ग सरल हो जाता है

आज श्रीमद् भागवत गीता के दूसरे दिन सैकड़ों श्रोताओं ने भाग लिया जिनमें माताओं बहनों व बच्चों को भी श्रीमद् भागवत ज्ञान का प्रसाद वितरित किया गया


लेख राम चौधरी द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का समय प्रतिदिन दोपहर 1-00 बजे से शाम 4-00 बजे तक निर्धारित किया गया है तथा इस कथा श्रवण के लिए क्षेत्र के सभी भक्तों वृंद को सपरिवार आमंत्रित किया गया हैं । आज भी क्षेत्र की महिलाओ व बच्चो सहित सैकडांे श्रोताओ ने कथा का आन्नद लिया ।