/अर्की में भाजपा नेता के रिश्तेदार की मनमानी के चलते गिरने लगा है पार्टी का ग्राफ।

अर्की में भाजपा नेता के रिश्तेदार की मनमानी के चलते गिरने लगा है पार्टी का ग्राफ।


सोलन (अर्की ) 8 अप्रैल,
हिम नयन न्यूज/ ब्यूरो

सोलन जिले के अर्की उपमण्डल मंे सरयांज पंचायत जो कभी भाजपा का गढ माना जाता रहा वर्तमान में लोगो का रूझान भाजपा से कम होने लगा है,इस के लिए एक भाजपा नेता के रिश्तेदार को जिम्मेदार बताया जा रहा है । याद रहे कि अर्की विधान सभा चुनाव क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक है और अपनी शालीनता तथा विकास के प्रति एक अलग नजरिया रखने के कारण लोगो का रूझान इन की ओर होने स्वभावविक है लेकिन सरयांज में अभी तक कांग्रेस के उम्मीदवार की ओर से कोई विकास कार्य भी नही करवाया गया है जिसके लिए लोागो का भाजपा से मोह भंग होता,इसके बावजूद भी यहां के लोग भाजपा से अपनी दूरी बनाने लगे है । इस बारे में जब हिम नयन न्यूज ने सरयांज पंचायत का एक सर्वे किया तो पता चला कि यहां भाजपा के कार्यकाल मंे करवाए गए विकास कार्यो में एक बडे नेता के रिश्तेदार द्वारा बेनामी ठेकेदारी करके लोगो की सम्पति को नुकसान पहुंचाना तथा अपने प्रभाव के चलते लोक निर्माण विभाग के अधिकारियो के साथ कथित मिली भक्त के चलते सरयांज गतेड सडक के लिए लगाए गए क्रेशर से निकलने वाली रोडी का अन्यत्र प्रयोग करना इस से हुए पुरानी सडक का नुकसान लोगो को भारी परेशानी का कारण बना पडा है । किसी की जमीन का कटान अनावश्यक रूप से करना किसी के घर का सीवरेज तक तबाह करने के मामले आज भी यहां जवलवंत मुद्दे भाजपा के प्रति लोगो की नाराजगी को कम नही कर पा रह है । हाल ही में इस उपमण्डल की सरयांज पंचायत में भाजपा का स्थापना दिवस मनाने के लिए मात्र चार व्यक्तियो को ही एकत्रित होने के लिए विवश होना पडा । भाजपा का गिरता ग्राफ लोगो का रूझान किस ओर ले जा रहा है इस बात के प्रमाण अभी भी सामने नही आए है ,लेकिन पिछले विधान सभा चुनाव में यहां से आजाद उम्मीदवार को ही ज्यादा समर्थन भी भाजपा के गिरते ग्राफ का प्रमाण देखने को मिला था । भाजपा के नेताओ को अभी भी अपने गढ माने जाने वाली पंचायत को सम्भालने के लिए इन चापलूस स्वार्थी रिश्तेदारो को लोगो का नुकसान करवाने से रोकना चाहिए । भाजपा का गिरता ग्राफयहां के भाजपा से दुरी बना रहे लोगो को भी चिंता का विषय है लेकिन अपना घर तुडवा कर कौन पार्टी के प्रति अन्ध भक्त बना रहेगा ,इस बात का फैसला पार्टी के शीर्ष नेताओ को करना है ।