नालागढ 24 अप्रैल,
हिम नयन न्यूज /ब्यूरो
भारत वर्ष में डिजिटल मीडिया और प्रिंट मीडिया के बीच में संघर्ष लगभग अन्तिम दौर पर पहुच गया है । इस पर समाज सेवक पत्रकार नुराता राम ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा है कि प्रिंट मीडिया अपनी अन्तिम सांसे गिन रहा है । उन्होने कहा कि समय परिवर्तनशील है और बदलाव प्रकृति का नियम है ।
“हम खड़े हैं, बैठे हैं ,सोए हैं,हंस रहे हैं या रो रहे हैं ,कोई फर्क नहीं पड़ता समय तो अपनी चाल से चलता रहेगा । परिवर्तन प्रकृति का नियम है, हर जीव पैदा होने के पश्चात जवानी और बुढ़ापे के दौर से गुजरता हुआ मृत्यु शैया पर पहुंचकर समाप्त हो जाता है । इसी प्रकार घटनाएं ,दुर्घटनाएं होती है तो हमें महीनों सालों बाद पता चलता था या फिर साप्ताहिक या मासिक पत्रिकाओं का दौर चला ,पहुंचते.पहुंचते समय का दौर आज की घटनाएं समाचार पत्रों द्वारा कल तक मिलनी शुरू हुई ,कुछ समाचार पत्र तो संध्या समाचार तक पहुंचे जहां सुबह का समाचार शाम को भी बड़े.बड़े शहरों में मिलने लगा और अनेक भाषाओं में समाचार पत्रों की खबर आमजन तक पहुंचने लगी और प्रिंट मीडिया का बोलबाला बढा लेकिन टेलीविजन का दौर शुरू होने से प्रिंट मीडिया का रुझान कम होने लगा और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की तरफ लोगों का रुझान बढ़ने लगा।
प्रिंट मीडिया को डिजिटल मीडिया ने पीछे धकेल दिया अब लाइव चैनल ने आम जनता को अपनी सेवाओं से प्रभावित करते हुए नए युग की शुरुआत की है कोई भी नेता देश विदेश के किसी भी कोने में संबोधन कर रहा है और जनता उसे सुनने के साथ देख भी रही है इस दौर में लगभग सभी समाचार पत्रों के संपादकों को अपनी साख को जिंदा रखने व सुरक्षित रखने के लिए अपने अपने चैनल शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ा और समय की चाल को पहचानते हुए जन आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रिंट मीडिया का स्थान डिजिटल मीडिया को देना पड़ा वर्तमान समय में प्रिंट मीडिया का दौर समाप्ति के मुहाने पर खड़ा है, अंतिम सांसे लेने को मजबूर है और डिजिटल मीडिया ने उसका स्थान ले लिया है ।
अंतिम दौर में डिजिटल मीडिया और प्रिंट मीडिया में कुछ देर तक संघर्ष चला लेकिन डिजिटल मीडिया के बढ़ते कदमों ने प्रिंट मीडिया को मात दी और आज प्रथम पंक्ति में जन सेवाएं देने में और जनता का विश्वास बनाने के दौर में तेजी से आगे बढ़ रहा है ,समय की चाल के साथ आगे कदम बढ़ा रहा है ,यह सब देखते हुए सरकार को डिजिटल मीडिया को तुरंत मान्यता प्रदान करनी चाहिए” ।









