सोलन 3 मई,
हिम नयन न्यूज /ब्यूरो
सोलन जिले के औधोगिक नगरी बीबीएन में बढते लिव इन रिलेशन के प्रचलन की आड में यहां जिस्म फिरोसी के धन्धे पर नुकेल कसना पुलिस प्रशासन के लिए भी एक टेडी खीर साबित हो रही है । मिली जानकारी के मुताबिक औधोगिक नगरी बीबीएन में वर्तमान में दुसरे राज्यो से यहां करीब एक लाख से ज्यादा युवा व युवतियां रह रहे है । उधोगो में काम धन्धा करते करते कुछ युवाओ का अपनी महिला मित्रो के साथ लिव इन रिलेशन में रहने के समाचार भी मिलने लगे है । आपसी सहमति से रह रहे युवओ व युवतियो को साथ रहने से पुलिस भी नियमानुसार नही रोक सकती है । जिस की आड में जिस्म फिरोशी के धन्धे को भी अन्जाम दिए जाने की सम्भावनाओ से इन्कार नही किया जा सकता है ।
पुलिस के सुत्रो की माने तो औधोगिक नगरी बीबीएन में हर महीने लिव इन रिलेशन में रह रहे युवाओ के आपसी मतभेद होने के बाद पुलिस के पास शारीरिक शोषण के मामले बना कर लाए जाते है जिस से पुलिस प्रशासन को इन मामलो में कौंसलिंग करवा कर मामले सुलझाने पड रहे है । सूत्रो की माने तो कुछ महिलाओ ने इस तरह का धन्धा अपना लिए है और अच्छे घरो के युवाओ को अपने झांसे में फंसा कर आधुनिकता का लिवास औढे या लिव इन रिलेशन के बहाने शारीरिक सम्बन्ध बनाने के बाद उन्हे ब्लैक मेल भी किया जा रहा है । युवाओ के आपसी सहमति से बनाए जा रहे शारीरिक सम्बन्ध जिस्म फिरोशी में आते है या नही इस बात पर पुलिस विभाग भी मतभेद रखता है।
गत दिवस औधोगिक नगरी में एक किराए के मकान में दो युवको व दो युवतियो को बद्दी पुलिस ने इस आरोप में पकडा है कि वह जिस्म फिरोसी का धन्धा कर रहे थे लेकिन दो युवक व दो युवतियां दो कमरे के सैट में रह रहे कहीं लिव इन रिलेशन में तो नही रह रहे थे । यदि यह दो जोडे लिव इन रिलेशन में रह रहे होगे तो जिस्म फिरोशी की धाराए उन पर लग पाएगी या नही यह तो कानून के ज्ञाता ही बता पाएंगे व कोर्ट में केस जाने के बाद ही फैसला हो पाएगा । दो जवान युवक व दो जवान युवतियां किराए के मकान में रह रहे है इस बात की मान्यता हमारा कानून किस हद तक देता है इस बारे में चर्चा की जानी चाहिए । पुलिस की कार्यवाही जिस्म फिरोशी को रोकने के लिए की गई होगी लेकिन वर्तमान में बढते लिव इन रिलेशन के प्रचलन ने समाज को कहीं अन्यत्र खडा कर दिया है जिस से पुलिस प्रशासन भी इस बात का निर्णय नही कर पा रहा है कि यह साथ साथ रहना जिस्म फिरोशी में गिना जाएगा अथवा यह कार्यवाही गलत साबित हो जाएगी ।

यदि कानून के ज्ञाताओ की माने तो 2013 में, सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं को पीडब्ल्यूडीवी अधिनियम, 2005 के तहत संरक्षित किया गया है क्योंकि लिव.इन रिलेशनशिप कानून की धारा 2(एफ) के तहत आता है जो घरेलू संबंध को परिभाषित करता है उसके तहत दो युवा जो लिंग भेद भी रखते हो आपसी सहमति से साथ रह सकते है कानून उन्हे साथ रहने की इजाजत देता है और पुलिस उनको रोक नही सकती है । इन विशेज्ञयो की माने तो घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 को घरेलू व्यवस्था में होने वाली विभिन्न प्रकार की हिंसा से महिलाओं को रोकने के लिए अधिनियमित किया गया था . यह अधिनियम उन महिलाओं पर भी लागू होता है जो एक ही घर साझा करके पुरुष साथी के साथ लिव.इन रिलेशनशिप में हैं और विचार में रहती हैं विवाह का लेकिन पत्नी के समकक्ष नहीं है। जब एक पुरुष और महिला विवाह, गोद लेने, सगोत्रता या परिवार के सदस्यों के रूप में एक साथ रहने के संबंध में एक साझा घर में रहते हैं, तो उन्हें घरेलू संबंध कहा जाता है। यद्यपि यह अधिनियम स्पष्ट रूप से लिव.इन संबंधों को स्वीकार नहीं करता है, प्रावधान .” विवाह की प्रकृति में संबंध” व्याख्या की अनुमति देता है ताकि महिलाओं के बुनियादी अधिकारों और हिंसा से रक्षा की जा सके।










