हिमाचल लोक निर्माण विभाग का निजीकरण बनाम ठेकेदारी प्रथा ।
शिमला 3 मई,
हिम नयन न्यूज/ ब्यूरो
हिमाचल के मुख्य मन्त्री के गृह जिले के जाहू में गत दिनो एक निर्माणाधीन पुल का स्लैब गिरने की गाज लोक निर्माण विभाग के तीन अधिकारियो पर गिरने का समाचार मिला है ।हिमाचल में लोक निर्माण विभाग एक बहुत ही महत्वपूर्ण विभाग है और पहाडी राज्य होने के कारण इस राज्य के विकास के लिए लोक निर्माण विभाग की अहम भूमिका रहती है लेकिन इस विभाग के सभी कार्य ठेकेदारो के माध्यम से ही करवाए जा रहे है जिस से इस विभाग का निजीकरण कहा जाए तो भी इतिश्योक्ती होगी ।
हिमाचल में किसी कार्य को करने के लिए विभाग टेंडर के माध्यम से बडे बडे ठेकेदारो को नियमानुसार कार्य आबंटित कर देते है लेकिन आगे कुछ राजनेताओ के कथित दबाव के चलते रजनेताओ के रिश्तेदार बेनामी ठेकेदार बन कर इन कार्याे को अपने हाथो में ले कर बडे ठेकेदारो की छवि तो धूमिल करते ही है उपर से जनता के विकास के लिए प्रयोग किए जाने वाली सामग्री का भी दुरूपयोग किए जाने के मामले भी सामने आते रहते है ।
हमीरपुर जिले के भोरंज विधानसभा क्षेत्र में जाहू में पुल और दो किलोमीटर सड़क निर्माण का कार्य का टेंडर 2.42 करोड़ रुपये में लोनिवि ने वर्ष 2020-21 में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी को आवंटित किया है। इस दौरान बीते 29 मार्च 2023 की रात को निर्माणाधीन पुल का स्लैब जमींदोज हो गया। प्रदेश सरकार ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए।
इस पर लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर इन चीफ शिमला ने लोनिवि के क्वालिटी कंट्रोल विंग की तीन सदस्यीय टीम गठित कर इस मामले की जांच के निर्देश दिए। तीन सदस्यीय टीम जब जाहू में पुल के निरीक्षण के लिए पहुंची तो टूटे हुए स्लैब की सामग्री मौके पर नहीं मिली। लोनिवि के अधिकारियों का मानना है कि संबंधित ठेकेदार ने रातोंरात स्लैब की सामग्री मौके से हटा दी थी। जिसके चलते सैंपल एकत्रित करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
इस मामले में लोनिवि के मुख्य अभियंता ने भोरंज स्थित लोनिवि के एसडीओ और दो कनिष्ठ अभियंताओं समेत ठेकेदार को कारण बताओ नोटिस जारी किए थे। लेकिन चारों के जवाब संतोषजक नहीं पाए गए। निर्माण कार्य में लापरवाही पाए जाने पर अब लोनिवि ने सरकार के आदेश पर तीन अधिकारियों को पुल के निर्माण कार्य से हटा दिया है। ऐसा माना जा रहा है कि बहुत जल्द ही तीनों अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की गाज भी गिर सकती है।
लोक निर्माण विभाग के सभी कार्य निजी ठेकेदारो के माध्यम से ही करवाए जाते है जिस से लगता है कि विभाग का निजीकरण होने से इस का आपसी तालमेल भी बेहतर रहेगा और नक्शे से ले कर उसके निर्माण का कार्य निजी हाथो में होने से इसकी गुणवता भी बेेहतर रहेगी और एक ही कम्पनी इस बात के लिए उत्तरदायी भी रहेगी ।











