/महिलाओ को मासिक धर्म चक्र के स्वास्थ्य उत्पाद और उनके प्रबंधन के बारे में बचपन से ही बुनियादी शिक्षा होनी चाहिए।

महिलाओ को मासिक धर्म चक्र के स्वास्थ्य उत्पाद और उनके प्रबंधन के बारे में बचपन से ही बुनियादी शिक्षा होनी चाहिए।


नालागढ 11 दिसम्बर

हिम नयन न्यूज/ ब्यूरो

महिलाओ को मासिक धर्म चक्र के स्वास्थ्य उत्पाद और उनके प्रबंधन के बारे में बचपन से ही बुनियादी शिक्षा होनी चाहिए इस विषय पर स्कूलो में कई तरह की चर्चाए व प्रोजैक्टस करवाए जात है लेकिन यह प्रोजैक्टस कभी समाज व सम्बन्धित विद्वानेा के संज्ञान में भी नही आते जिस से वह वही दफन हो कर रह जाते है


नालागढ उपमण्डल के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बारियां में मैन्स्ट्रूअल प्लास्टिक कचरे को रोकने के लिए स्कूल में सैनिटरी पैड पर एक प्रोजेक्ट के तहत कार्य किया जा रहा है । एक शिक्षिका ने बताया कि उनके स्कूल में भी महिलाओ द्वारा मासिक धर्म चक्र के स्वास्थ्य उत्पाद और उके प्रबन्धन पर एक प्रोजेक्ट करवाया जा रहा है ।

यह जानकारी बारियां स्कूल की टीजीटी ,चन्द्रेश राणा ,ने देते हुए बताया कि स्कूल तथा उनके आस पास की लडकियां व महिलाएं जो सेनेटरी पैड का उपयोग करती है उसे फेंक देती है अथवा जला देती है जो पर्यावरण के लिए भी हानिकारक होता है । इन महिला शिक्षिकाओ की माने तो महिलाओ व बच्चियो को मासिक धर्म कप का उपयोग करने चाहिए जो कि मासिक धर्म के रक्त को अवशोषित नही करता बल्कि एकत्र करता है जिसे शौचालय में आसानी से बहाया जा सकता है ।

उन्होने हिम नयन न्यूज से इस बात का खुलासा करते हुए बताया कि महिलाओ के लिए मासिक धर्म स्वच्छता उत्पादो का विज्ञापन कहीं भी नही किया जाता है इसलिए उन्हे इसके विकल्पो का पता ही नही चल पाता है । इस लिए अभी तक कोई विशेष उत्पाद नही बनाए गए है ।


स्कूल की अध्यापिका ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत पर्यावरण पर चिन्ता व्यक्त करते हुए पर्यावरण संरक्षण विद्दो से सवाल किया कि क्या कभी उन्होने इस बारे में विचार किया कि हर महीने 100 करोड सेनेटरी पैड सीवर सिस्टम या लैण्ड फिल्ड में फेंके जाते है ,और एक पैड में लगभग चार पॉलिथीन के बराबर प्लास्टिक होता है और यह प्लास्टिक 500 से 600 साल तक अपघटित नही होते । यह प्लास्टिक टूटते है माइक्रो प्लास्टिक में और फिर पहुंच जाते है नदियो में समुद्र में और हवा से होते हमारे खाने में हमारे शरीर में । उन्होने बताया कि यह सैनीटरी पैडज को जलाया जाए तो इनमें से डायोक्सीन और फयूरिन नाम की जहरीली गैसे उत्सर्जित होती है जो कई घातक बिमारियो का कारण होती है ।

इस महिला शिक्षक के मुताबिक प्रोजेक्ट के लिए जुटाए गए नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे के आंकडो के अनुसार भारत की 140 करोड जनसंख्या में से 33 करोड महिलाए मॅस्ट्रएटिग है और लगभग 12 करोड महिालाए माहवारी के समय सेनेटरी पैड का इस्तेमार करती है उन्होने चिन्ता जाहिर की कि यदि देश की हर महिला सेनेटरी पैड उपयोग करने लगेगी तब पर्यावरण का क्या होगा इस बारे में विचार करने की आवश्यकता है ।

उन्होने बताया कि मासिक धर्म एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दा है जिस पर सरकारए नागरिक समाज की ओर से तत्काल ध्यान आकर्षित करने की आवश्यकता है स्त्रियों को मासिक धर्म चक्र स्वास्थ्य उत्पाद और उनके प्रबंधन के बारे में बचपन से ही बुनियादी शिक्षा होनी चाहिए। मासिक धर्म के रक्त को अवशोषित करने या एकत्रित करने के लिए महिलाओं के पास स्वच्छ सामग्री तक सुरक्षित पहुंच होनी चाहिए और यह वस्तु उन लोगों को स्वीकार्य होने चाहिए जिन्हें उनकी आवश्यकता है।