/एक अस्पताल जिसे इंतजार है डॉक्टरों का

एक अस्पताल जिसे इंतजार है डॉक्टरों का

सोलन 1अप्रैल,
हिम नयन न्यूज़ /ब्यूरो/ मनमोहन सिंह

किसी भी समाज के लिए रोटी, कपड़ा और मकान के बाद अगर कोई चीज़ सबसे महत्वपूर्ण है, तो वह है शिक्षा और स्वास्थ्य, लेकिन बदकिस्मती से ये दोनों ही सरकारी एजेंडे में सबसे निचली पायदान पर हैं।

हिमाचल प्रदेश का दरवाजा धर्मपुर, इसका का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरसों से डॉक्टरों की बाट जोह रहा है।

सरकार चाहे कांग्रेस की हो या बीजेपी की कोई फर्क नहीं पड़ता। इस सामुदायिक केंद्र में जहां 150 से 200 मरीज़ हर रोज़ ईलाज के लिए आते हैं, मात्र एक डॉक्टर है।

यहां की यह हालत तब भी थी जब बीजेपी की सरकार के एक स्वास्थ्य मंत्री धर्मपुर में ही रहते थे। इसके अलावा धर्मपुर राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर स्थित है इसलिए जितने भी वीवीआईपी हिमाचल प्रदेश में आते या जाते हैं उनके काफिले में शालाघाट से कालका के साथ लगते गांव टिपरा तक एक डॉक्टर और एक फार्मासिस्ट की ड्यूटी इसी स्वास्थ्य केंद्र से लगती है। अब एक डॉक्टर और वो भी वीवीआइपी ड्यूटी पर, तो मरीजों की हालत का अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं।

डॉक्टर्स की गैर मौजूदगी में कई बार ब्लडप्रेशर चेक करने जैसे काम चौथी श्रेणी कर्मचारी से लिए जाते हैं। वैसे डॉक्टर्स की कमी के कारण अक्सर इसके साथ लगते सबाथू, पराथा, सुल्तानपुर, जंगेशु, दियोठी, या नौनी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से डॉक्टर्स इमरजेंसी ड्यूटी के लिए बुलाए जाते हैं।

इस सरकार में भी स्वास्थ्य विभाग का मंत्रालय सोलन से विधायक कर्नल धनी राम शांडिल के पास है। पर धर्मपुर की सुध लेने वाला कोई नहीं। पंचायत के स्तर पर भी कोई गंभीर प्रयास नहीं किया जा रहा।

ठियोग में भी कमोवेश यही स्थिति थी पर वहां की जुझारू जनता ने एक बड़ा जन आंदोलन चला कर वहां डॉक्टर्स की कमी को पूरा करा लिया। क्या धर्मपुर के लोगों को भी कुछ ऐसा ही करना पड़ेगा ?

धर्मपुर में डॉक्टर न होने के कारण यहां के मरीजों को ईलाज के लिए या तो 16 किलोमीटर दूर सोलन या 11-12 किलोमीटर दूर एम एम यू सुल्तानपुर जाना पड़ता है।

धर्मपुर में डॉक्टर न होने की वजह प्रदेश में डॉक्टर्स कमी बताई जाती है, जबकि हिमाचल प्रदेश के सात मेडिकल कॉलेजेस से हर साल लगभग 750 डॉक्टर पासआउट होते हैं। यह एक गंभीर स्थिति है। मैं इस मुद्दे पर अपने अगले लेखों में बात करूंगा।