सोलन 31जुलाई,
हिम नयन न्यूज/ ब्यूरो/
साभार मनमोहन सिंह
हरफनमौला खिलाड़ी रवींद्र जडेजा और वॉशिंगटन सुंदर ने जुझारू पारी खेल कर चौथे टेस्ट में भारत की इज़्ज़त बचा ली।
इससे पहले कप्तान शुभम गिल और के एल राहुल ने अति नाजुक स्थिति से टीम को उभार लिया था। भारत के 358 के स्कोर के जवाब में इंग्लैंड ने 669 का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया। उनके हर बल्लेबाज के आगे हमारे गेंदबाज बौने साबित हो रहे थे। जसप्रीत बुमराह को छोड़ बाकी सभी भारतीय तेज गेंदबाज अपना कोई प्रभाव नहीं छोड़ पाए। ऐसे मैच में जिसमें श्रृंखला बचाने की नौबत थी, अंकुश कंबोज को खिलने की बात समझ में नहीं आई। यह युवा खिलाड़ी 124- 125 किलोमीटर की औसतन गति से गेंद फेंकता है। इतनी गति के कोई मायने नहीं हैं। इंग्लैंड के बल्लेबाज उसका मज़ाक बना रहे थे। वे क्रीज छोड़ काफी आगे खड़े हो कर उसकी गेंदों को पीट रहे थे। भारत की स्लिप फील्डिंग में सुधार की बहुत ज़रूरत है।
उसका कारण है कि भारत की मौजूदा टीम मुख्य रूप से आई पी एल में खिलाड़ियों प्रदर्शन के आधार पर चुनी गई है। आई पी एल का फॉर्मेट टेस्ट क्रिकेट से बिल्कुल अलग है।
उसमें नज़दीकी क्षेत्ररक्षक न के बराबर होते हैं। अव्वल तो उसमें स्पिन गेंदबाजी का उतना महत्व होता नहीं और अगर कोई स्पिनर खेलता है तो फिर वह विकेट लेने की बजाए रन रोकने पर अधिक ध्यान देता है।
भारत की टीम के साथ गए पदाधिकारी आज तक यह नहीं समझ पाए कि अंग्रेज़ बल्लेबाज पारंपरिक तौर पर स्पिन खेलने में कमज़ोर साबित होते हैं। इस मैच में भी इंग्लैंड की 10 विकटों में से छह विकेट रविंदर जडेजा (चार) और वॉशिंगटन सुंदर (दो) ने लिए। इसके अलावा दो विकेट जसप्रीत बुमराह और एक एक विकेट कंबोज और सिराज को मिले। इसमें भी ध्यान देने वाली बात यह है कि जडेजा और सुंदर को गेंदबाजी में लाने की लिए बहुत देर की गई। यहां यह बात भी गौर करने की है कि ये दोनों खिलाड़ी कोई विशेषज्ञ स्पिनर नहीं हैं बल्कि आल राउंडर की श्रेणी में आते हैं।
इन दोनों के पास न तो फ्लाइट है न उतना घुमाव। इनकी गेंदों की औसत गति भी 90 किलोमीटर के आसपास रहती है। फिर भी ये छह विकेट ले गए।
कुलदीप यादव क्यों नहीं?:
भारतीय टीम के साथ गए मुख्य स्पिन गेंदबाज कुलदीप यादव तुरुप का पत्ता साबित हो सकते हैं। वो बाएं हाथ के कलाई स्पिनर हैं जो ‘चाइनामन’ का बहुत अच्छा इस्तेमाल करते हैं। हालांकि वो भी फ्लाइट पर अधिक निर्भर नहीं रहते पर इंग्लैंड में प्रभावी साबित हो सकते हैं। पता नहीं उन्हें क्यों नहीं खिलाया गया?
अगर पांचवे टेस्ट में भारत को जितना है तो कुलदीप यादव का खेलना ज़रूरी है।






