/भारतीय हॉकी टीम को आलस छोड़ना होगा।

भारतीय हॉकी टीम को आलस छोड़ना होगा।

सोलन 1 सितम्बर,
हिम नयन न्यूज़/ब्यूरो/ साभार मनमोहन सिंह

आजकल बिहार में एशिया कप हॉकी टूर्नामेंट चल रहा है। ऐसा लगता है कि भारत अभी आलस में है। हमने अपने पूल के पहले दोनों मैच जीत लिए हैं। पहले मैच में हमने चीन को 4-3 से और दूसरे में जापान को 3-2 से हराया। हम लोगों को इन दोनों मैचों में भारत का प्रदर्शन औसत दर्जे का दिखा। ध्यान रहे चीन और जापान दोनों ही विश्व हॉकी में कोई ऊंचा स्थान नहीं रखते। इन दोनों मैचों में भारत संघर्ष करता दिखा।

आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? मेरे विचार में इसके दो प्रमुख कारण हैं। और ये कारण अब से नहीं पिछले कुछ दशकों से चले आ रहे हैं। अगर इस टूर्नामेंट को ही लें तो भारत ने इन दो मैचों में कुल सात गोल किए। और इन सात में से पांच गोल टीम के कप्तान हरमनप्रीत की स्टिक से निकले। केवल एक फील्ड गोल हुआ जो मनदीप ने किया।

एक गोल जुगराज ने बनाया। इसका साफ अर्थ है कि हमारे फॉरवर्ड गोल नहीं कर पा रहे। ‘डी’ के अंदर जिस गति और सटीकता की ज़रूरत है वह नज़र नहीं आती। इसी कारण उनकी कोशिश पेनल्टी कॉर्नर्स लेने की होती है। चीन के खिलाफ हमें 11 पेनल्टी कॉर्नर्स मिले पर चार ही गोल में बदले जा सके। सवाल यह है कि कब तक हम रक्षण से लेकर स्कोर करने का जिम्मा हरमनप्रीत पर डाल के रखेंगे? हर टीम वीडियो पर हरमनप्रीत के पेनल्टी कॉर्नर्स का अध्ययन करती है और उनका डिफेंस तैयार कर लेती है।

हमारे पास कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। ओलंपिक में तो यूरोपीय टीमों ने हरमनप्रीत पर एक की जगह दो दो फ्रंट रशर लगा रखे थे जो उनके सारे कोण ब्लॉक कर देते थे। हालांकि इससे उनका पीछे का रक्षण कमज़ोर हो जाता पर जब भारत उसका लाभ लेने के लिए कोई रणनीति नहीं बनाता तब तक वो चलता रहा। भारत को पेनल्टी कॉर्नर्स में भी विविधता लानी चाहिए। हरमनप्रीत के साथ जुगराज अच्छा फ्लिक लगाते हैं, उन्हें अधिक अवसर देने की ज़रूरत है।

अब बात उन पांच गोलों की जो दो मैचों में भारत पर हुए। यह सही है कि श्रीजेश की कमी खल रही है पर बाकी डिफेंस कहां है। हमारी सबसे कमज़ोर कड़ी है हमारी मध्य पंक्ति। इन दोनों मैचों में देखा गया कि हम मिड फील्ड में गेंद नियंत्रण नहीं कर पा रहे। यह जिम्मेदारी हमारे डीप डिफेंस और गोलरक्षक पर आ जाती है।

खास तौर से जब दूसरी टीम का जवाबी हमला होता है तो वे अपनी 23 मीटर की लाइन से हमारी 23 मीटर की लाइन तक आसानी से पहुंच जाते हैं। अब गोल में श्रीजेश के न होने से अक्सर चूक हो रही है।

सबसे ज़रूरी है फॉरवर्डस का गोल करना और मिड फील्ड का मजबूत खेल। मिडफील्ड का काम हमलों को बनाना और सही पोजीशन पर फॉरवर्ड्स को पास करना। लेकिन उन्हें ‘डी’ में घुस के भीड़ करने की ज़रूरत नहीं है। गेंद को फीड करके उन्हें मिड फील्ड में डिफेंस करने और गेंद फिर से अपने फॉरवर्ड खिलाड़ियों तक पहुंचाने की ज़रूरत है।

जर्मनप्रीत और हार्दिक बहुत मंजे हुए खिलाड़ी हैं वे थोड़ा ध्यान देंगे तो तस्वीर बदल सकती है। वैसे भारत यहां खेल रही सभी टीमों से कहीं ऊंचे दर्जे की टीम है। उसे बस साबित करना है।