/हिमाचल के कर्मचारियों को झटका, सुक्खू सरकार ने हटाया वेतन नियम 7A

हिमाचल के कर्मचारियों को झटका, सुक्खू सरकार ने हटाया वेतन नियम 7A

परिवर्तन का असर: मासिक वेतन में 10–20 हजार तक की कटौती, कर्मचारी संगठनों में भारी आक्रोश

शिमला 7 सितंबर,
हिम नयन न्यूज़/ब्यूरो/वर्मा

हिमाचल प्रदेश सरकार ने हाल ही में नियम 7-A (Rule 7A) को हटाकर हजारों कर्मचारियों को वित्तीय संकट में डालने वाला निर्णय लिया है। वित्त विभाग ने 6 सितंबर 2025 को यह महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की है।


अधिसूचना का विस्तृत विवरण

पुरानी अधिसूचना (3 जनवरी 2022):
शासन ने “Himachal Pradesh Civil Services (Revised Pay) Rules, 2022” लागू किए, जिसमें Rule 7A जोड़ा गया था। इस प्रावधान के अनुसार उन पदों पर, जहां पे बैंड या ग्रेड पे पहले नहीं समायोजित किया गया था, मूल वेतन को 2.59 गुणा करके प pay matrix में स्थिति निर्धारित की जाती थी—अन्यथा यह गुणांक 2.25 रहता।

वर्तमान संशोधन (6 सितंबर 2025):
वित्त विभाग ने अधिसूचना संख्या Fin-(PR)B(7)-1/2021-II दिनांक 6 सितंबर 2025 जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि:

“Rule 7A is deleted ab-initio. It shall be deemed to have never existed. This amendment is effective from 03.01.2022. No recovery shall be made of any excess payment already made under the said rule.”

यानि, अब वेतन को पुनः इस तरह ठहराया जाएगा, जैसे Rule 7A कभी लागू ही नहीं हुआ था। बावजूद इसके, अतिवेतन की कोई वसूली नहीं की जाएगी।


संभावित वित्तीय प्रभाव

कर्मचारी संगठनों का अनुमान है कि इस कटौती के कारण लगभग 89 श्रेणियों के कर्मचारी हर महीने ₹10,000–₹20,000 तक कम वेतन प्राप्त कर सकते हैं। इससे लगभग 10,000 से 14,000 कर्मचारियों को प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।


कर्मचारी संगठनों की प्रतिक्रिया

सचिवालय कर्मचारी संगठन:

आपात बैठक बुलाई गई।

अध्यक्ष संजीव शर्मा, महासचिव कमल कृष्ण शर्मा, वरिष्ठ उपप्रधान रमन शर्मा सहित अन्य पदाधिकारी शामिल।

8 सितंबर को मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और प्रधान सचिव (वित्त) से मुलाकात कर अधिसूचना वापस लेने की मांग की जाएगी।

पाटवारी-कनूनगो एसोसिएशन:

अध्यक्ष सतीश चौधरी, उपाध्यक्ष अजय कपूर, महासचिव चंदर मोहन और सलाहकार हेमराज शर्मा ने संयुक्त बयान में इसे न्याय और मनोबल के खिलाफ बताया।

चेतावनी: यदि यह निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो वे पेन-डाउन हड़ताल जैसे आंदोलन तक जाने के लिए मजबूर हो सकते हैं।

कर्मचारी संगठन विशेष रूप से परेशान हैं क्योंकि पहले से ही महंगाई भत्ता (DA) लंबित है, और इस कटौती से उनकी वित्तीय स्थिति और खराब हो जाएगी। वे कहते हैं कि बच्चों की पढ़ाई, ऋण की किश्तें, स्वास्थ्य संबंधी खर्च, और मातापिता की देखभाल जैसे जरूरी खर्चों को पूरा करना मुश्किल हो जाएगा।


निष्कर्ष

पुराना नियम 7A (2022) कर्मचारियों को अतिरिक्त लाभ देता था।

नवीन संशोधन (2025) से उस सुविधा को हटाया गया और बीते तीन वर्षों को कानूनी रूप से अस्तित्वहीन माना गया।

वसूली से छूट मिली, लेकिन मासिक वेतन पर सीधा और भारी प्रभाव पड़ेगा।

कर्मचारी संगठनों द्वारा सरकार से तुरंत वापस लेने का दबाव जारी है, अन्यथा वे संगठनात्मक कार्रवाई पर उतर सकते हैं। देखना है कर्मचारियों को OPS दे कर सत्ता हासिल की है अब कर्मचारियों के हितों को ताक पर रख कर आगे चुनावों में पार्टी क्या पैंतरा चलती है।