/मुख्य सचिव की नियुक्ति पर सतर्कता मंजूरी को लेकर विवाद

मुख्य सचिव की नियुक्ति पर सतर्कता मंजूरी को लेकर विवाद

शिमला, 15 सितम्बर ,
हिम नयन न्यूज़/ब्यूरो/वर्मा

हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना की हिमाचल प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (एचपीईआरसी) के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति विवादों में घिर गई है। उनकी सतर्कता मंजूरी (Vigilance Clearance Certificate) को लेकर एक शिकायत दर्ज हुई है, जिसमें इसकी वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।

शिमला निवासी अतुल शर्मा ने राज्य सरकार से मंजूरी की समीक्षा की मांग करते हुए कहा कि यह केंद्र सरकार के 9 अक्टूबर 2024 को जारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।

इन दिशा-निर्देशों के अनुसार आपराधिक मामलों का सामना कर रहे अधिकारियों को संवेदनशील पदों या सेवानिवृत्ति के बाद पुनर्नियुक्ति के लिए योग्य नहीं माना जा सकता।

सक्सेना वर्तमान में 30 सितम्बर 2025 तक सेवा विस्तार पर हैं और एचपीईआरसी अध्यक्ष पद के दावेदारों में शामिल हैं।

शिकायत में कहा गया है कि सक्सेना भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के एक मामले में आरोपी हैं, जो दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत में लंबित है।

हालांकि, अदालत ने सितम्बर 2022 में उन्हें सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत उपस्थिति से स्थायी छूट प्रदान कर दी थी।

शिकायतकर्ता ने तर्क दिया है कि ऐसे हालात में सतर्कता मंजूरी देना केंद्रीय दिशा-निर्देशों के विपरीत है और इससे “चार्जशीटेड अधिकारी” को संवेदनशील पद पर नियुक्त करने की स्थिति बनेगी। उन्होंने सरकार से मंजूरी वापस लेने की अपील की है।

अब फैसला राज्य सरकार को करना है कि वह अपनी मंजूरी पर कायम रहती है या शिकायत को देखते हुए इसे पुनः परखे। इस विवाद का असर न केवल सक्सेना की नियुक्ति पर बल्कि संपूर्ण चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी पड़ सकता है।