धरती का सीना छलनी बना हिमाचल की प्रकृति पर संकट का कारण
नालागढ़, 16 सितम्बर,
हिम नयन न्यूज़/ब्यूरो/ वर्मा
हिमाचल प्रदेश की वादियां जहां कभी हरे-भरे जंगलों, निर्मल नदियों और उपजाऊ खेतों के लिए जानी जाती थीं, वहीं आज अवैध खनन ने इस प्राकृतिक धरोहर को गहरी चोट पहुंचाई है।

नालागढ़ क्षेत्र में प्रतिदिन पुलिस और प्रशासन की ओर से खनन माफियाओं पर कार्रवाई की जाती है। टीपर और अन्य वाहन पकड़े भी जाते हैं, लेकिन सवाल जस का तस बना हुआ है – जब रोज कार्रवाई होती है तो यह खनन रुकता क्यों नहीं?

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस धंधे में बेहिसाब कमाई छिपी हुई है। रेत-पत्थर और बजरी के अवैध कारोबार ने “धरती मां का सीना छलनी” कर दिया है।
आरोप यह भी लगते हैं कि इस काम में लगे लोगों को कहीं न कहीं से संरक्षण प्राप्त है, जिस कारण प्रशासन गरीब और बिना संरक्षण वालों पर तो डंडा चलाता है, लेकिन बड़े स्तर पर सक्रिय खनन नेटवर्क पर पूरी तरह से रोक नहीं लग पा रही।

हिमाचल की नदियां जो कभी जीवनदायिनी मानी जाती थीं, आज खनन की मार से विकृत हो रही हैं। पहाड़ों का संतुलन बिगड़ रहा है, और मिट्टी के कटाव से गांव-घर तक प्रभावित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अवैध खनन इसी तरह जारी रहा तो आने वाले समय में बाढ़, भूस्खलन और जल संकट जैसी प्राकृतिक आपदाएं और विकराल रूप ले सकती हैं।

जनता का दर्द यह है कि वैध खनन की आड़ में भी कई बार धरती की लूट जारी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ “दिखावे की कार्रवाई” बनकर रह गया है, जबकि असली समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है।
लोगों का मानना है कि अब केवल प्रशासनिक आदेश या पुलिस कार्यवाही काफी नहीं होंगे। “धरती मां” खुद ही इस अन्याय का हिसाब चुकाएगी।

लेकिन सवाल यह है कि क्या सरकार और समाज समय रहते जाग पाएंगे या फिर हिमाचल की प्राकृतिक धरोहर केवल कहानियों और यादों तक सीमित रह जाएगी?










