/सावधान! कहीं हम स्वयं तो नहीं दुनिया के प्रलय के कारण

सावधान! कहीं हम स्वयं तो नहीं दुनिया के प्रलय के कारण

शिमला, 24 सितंबर,
हिम नयन न्यूज़ /ब्यूरो/ वर्मा।

आज पूरी दुनिया ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहाँ मानवता के भविष्य पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग चुके हैं। प्रलय का कारण प्राकृतिक शक्तियाँ नहीं, बल्कि कहीं हम स्वयं तो नहीं बनते जा रहे?

विश्व युद्ध की आशंकाएँ, सत्ता और धन की लालसा में इंसान का इंसान से बैर रखना, आपसी भाईचारे का समाप्त होना और दूसरों को नीचा दिखाने के लिए घटिया से घटिया हथकंडे अपनाना—ये सभी संकेत मानव सभ्यता को विनाश की ओर धकेल रहे हैं।

न्याय की तलाश में भटकते लोगों का शोषण, नारी शक्ति पर अत्याचार और समाज में बढ़ता असमानता का बोझ, मानवता की आत्मा को ही कमजोर कर रहा है। वहीं, पर्यावरण प्रदूषण ने प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़कर प्रलय के खतरे को और निकट ला दिया है। हिमालय का पिघलना, पहाड़ों का ध्वंस, नदियों का मार्ग बदलना—ये सभी घटनाएँ इंसान के लालच और लापरवाही का परिणाम हैं।

धर्म के नाम पर हिंसा और सत्ता का दुरुपयोग भी इस संकट को और गहरा बना रहे हैं। विडंबना यह है कि इंसान अपनी प्रगति की होड़ में यह भूल बैठा है कि प्रकृति और समाज का संतुलन ही उसके अस्तित्व की असली आधारशिला है।

आज आवश्यकता है आत्ममंथन की। यदि हम समय रहते नहीं जागे तो प्रलय हमारे ही कर्मों का परिणाम होगा। बदलाव की शुरुआत हमें खुद से करनी होगी—आपसी सद्भाव, नारी सम्मान, न्याय की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम उठाकर ही हम आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य दे सकते हैं।

प्रलय को रोकने की चाबी हमारे ही हाथों में है, प्रश्न बस इतना है कि क्या हम इसे समय रहते उपयोग करेंगे?