जीएसटी युक्तिकरण से हिमाचल प्रदेश को लगभग 1000 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष नुकसान
शिमला, 27 सितम्बर,
हिम नयन न्यूज़ /ब्यूरो/ वर्मा ।
तकनीकी शिक्षा एवं नगर नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सीमेंट की कीमत पाँच रुपये प्रति बैग बढ़ाने का निर्णय वित्तीय संतुलन बनाए रखने की मजबूरी है। उन्होंने बताया कि जीएसटी परिषद द्वारा सीमेंट पर कर दर 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने के फैसले से हिमाचल प्रदेश को लगभग 1000 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष नुकसान उठाना पड़ा है।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि वैट व्यवस्था के दौरान राज्य का राजस्व 16 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा था, जबकि जीएसटी लागू होने के बाद यह घटकर मात्र 7 से 8 प्रतिशत रह गया। जून 2022 में केंद्र सरकार ने क्षतिपूर्ति उपकर बंद कर दिया, जबकि पहले परिषद ने आश्वासन दिया था कि छोटे राज्यों को घाटे की भरपाई की जाएगी।
धर्माणी ने कहा कि हिमाचल जैसे छोटे पहाड़ी राज्य के पास संसाधन सृजन के सीमित विकल्प हैं। ऊपर से वर्ष 2023 से लगातार आई प्राकृतिक आपदाओं ने प्रदेश को करीब 16,000 करोड़ रुपये का नुकसान पहुँचाया है। ऐसे में राजस्व वृद्धि में कमी और मुआवजे के अभाव ने राज्य की वित्तीय स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

उन्होंने विपक्ष की आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि यदि वे वित्तीय ढाँचे को समझते, तो पाँच रुपये प्रति बैग की मामूली बढ़ोतरी पर इतना हंगामा नहीं करते। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सीमेंट दर में यह बढ़ोतरी भी राज्य को हुए वास्तविक घाटे की भरपाई नहीं कर सकेगी।
धर्माणी ने कहा कि जीएसटी युक्तिकरण से पहले राज्य को लगभग 5300 करोड़ रुपये का राजस्व मिल रहा था, जबकि अब इसमें भारी कमी आई है। हालांकि सीमेंट पर कर घटाने से गरीब और मध्यम वर्ग को राहत मिली है, लेकिन इसके चलते विकास कार्यों के लिए मिलने वाले राजस्व पर गहरा असर पड़ा है।









