एक खेल जिसने देश का सर ऊंचा रखा
सोलन 7 नवम्बर
हिम नयन न्यूज़/ब्यूरो/मनमोहन सिंह
खेलों के महाकुंभ ओलंपिक में अगर भारत का नाम अगर किसी ने बनाए रखा तो वह है हॉकी। सन 2008 से पहले भारत के नाम हॉकी के अलावा किसी खेल का स्वर्ण पदक नहीं था।
वैसे भी सन 1900 से लेकर आज तक के ओलंपिक खेलों में भारत ने जो 41 पदक ओलंपिक खेलों में भारत ने जीते हैं उनमें से 12 अकेली हॉकी में आए हैं।
इन बारह पदकों में आठ गोल्ड, एक सिल्वर और तीन कांस्य पदक शामिल हैं। हॉकी के अलावा किसी टीम गेम में सभी तक भारत का कोई पदक नहीं है। सबसे अच्छा प्रदर्शन हमारी फुटबॉल टीम का 1956 के मेलबर्न ओलंपिक में रहा था जहां हमारी टीम सेमीफाइनल तक पहुंची थी।
तो कुल मिला कर भारत का झंडा हमेशा हॉकी ने बुलंद रखा। आज के इस लेख में मैं बात कर रहा हूं भारत में हॉकी के इतिहास की। जहां तक विश्व हॉकी की बात है तो उसकी शुरुआत तो 1885 से पहले हो चुकी थी।
क्योंकि 1885 में आडगल वेस्टमैकॉट ने हॉकी के खेल में स्ट्रीकिंग सर्किल यानी ‘डी’ की खोज की। आज उन्हें ही आधुनिक हॉकी का जन्म दाता माना जाता है।
अंतरराष्ट्रीय हॉकी फेडरेशन ” फेडरेशन इंटरनेशनाले डी हॉकी ” अर्थ एफ आई एच सात जनवरी 1924 को बनाई गई। इसकी स्थापना फ्रांस में हुई। इसके फाउंडर सदस्यों में ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, चाकोस्लोवाकिया, फ्रांस, हंगरी, स्पेन, और स्विट्ज़रलैंड शामिल थे।
इसके पहले अध्यक्ष फ्रांस के पॉल लियूटी को चुना गया। भारत 1928 में इसका सदस्य बना और उसी साल उसने एमस्टरडम ओलंपिक में हॉकी टीम भेजी जो गोल्ड मेडल जीत कर लौटी। दूसरे विश्व युद्ध से पूर्व यानी 1939 से पहले 17 देश इसके सदस्य बन चुके थे।
अब बात भारत की। भारत में हॉकी फेडरेशन बनाने की पहली कोशिश 1908 में कोलकाता जिसे उन दिनों कलकत्ता कहा जाता था में हुई। यह प्रयास करने वालों में ए बी पोसर, एन आर भट्टाचार्जी और एम टी एच रिचर्डसन शामिल थे। पर उन्हें कलकत्ता के बाहर से कोई समर्थन नहीं मिला।
इसके 12 साल बाद 1920 में सी ई न्यूहम कोशिश की। यही न्यूहम बाद में फेडरेशन के उपाध्यक्ष और पंजाब हॉकी एसोसिएशन के अध्यक्ष भी बने। पर उनकी वह कोशिश नाकाम साबित हुई।
इसके बाद 1924 में वेस्टर्न इंडिया हॉकी एसोसिएशन के अध्यक्ष और ग्वालियर स्पोर्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष लेफ़्टिनेंट कर्नल सी ई लुआर्ड ने देश के सभी खेल क्लबों, और खेलों के शौकीन लोगों को ग्वालियर बुलाया। यह कोशिश थी एक भारतीय हॉकी फेडरेशन बनाने की।
ग्वालियर की यह बैठक सात सितंबर 1924 को हुई। इसमें कर्नल ब्रूस टर्नबुल को अध्यक्ष, और एन एच अंसारी को महासचिव चुना गया। पर अगले दो साल तक धरातल पर कोई कम नहीं हुआ।
फिर 1927 में भारतीय हॉकी फेडरेशन का मुख्यालय ग्वालियर से दिल्ली लाया गया और दिल्ली हॉकी एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष टी पी गेटले को महासचिव का कार्यभार सौंपा गया और मेजर आई मर्डोक भारतीय हॉकी फेडरेशन के अध्यक्ष बनाए गए। उन्हीं के समय भारतीय हॉकी फेडरेशन ने 1928 ओलंपिक के लिए भेजी।










