— चिकित्सा विज्ञान में नैतिकता, नवाचार और मानवता पर बल
चंडीगढ़, 8 नवम्बर ,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो/ वर्मा
पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर), चंडीगढ़ में आज राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान अकादमी (भारत) (एनएएमएस) का 65वां दीक्षांत समारोह भव्य रूप से आयोजित किया गया। समारोह में देशभर से आए 300 से अधिक प्रतिष्ठित चिकित्सक, शोधकर्ता और शिक्षाविदों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में हरियाणा के माननीय राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष मुख्य अतिथि, डॉ. विनोद कुमार पॉल (सदस्य, नीति आयोग) सम्मानित अतिथि तथा डॉ. दिगंबर बेहरा, अध्यक्ष, एनएएमएस (भारत) ने अध्यक्षता की।

राज्यपाल प्रो. घोष ने कहा, “ईमानदारी वह नैतिक दिशा-सूचक है जो चिकित्सा विज्ञान का मार्गदर्शन करती है। तकनीक और व्यावसायिकता के इस युग में सेवा की भावना ही सच्चा विज्ञान है। सफेद कोट विशेषाधिकार का नहीं, बल्कि सेवा का प्रतीक है।” उन्होंने चिकित्सकों से आग्रह किया कि वे हर मरीज को केवल ‘केस’ नहीं, बल्कि “गरिमा और आशा से भरे जीवन” के रूप में देखें।
डॉ. विनोद कुमार पॉल ने कहा कि “भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपभोक्ता नहीं, बल्कि सृजक बनना होगा — ऐसे समाधान विकसित करने होंगे जो नैतिक, स्वदेशी और रोगी-केंद्रित हों।”
उन्होंने बताया कि विकसित भारत 2047 की दिशा में “स्वस्थ भारत” ही वास्तविक आधार है और चिकित्सा क्षेत्र को इसमें अग्रणी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने सरकारी संस्थानों में 50 किडनी और 20 लिवर ट्रांसप्लांट टीम तैयार करने का संकल्प भी साझा किया।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. दिगंबर बेहरा ने कहा कि एनएएमएस भारतीय चिकित्सा जगत का “नैतिक और शैक्षणिक प्रहरी” है, जो अनुसंधान, नीति और शिक्षा के माध्यम से “विज्ञान को मानवता की सेवा में समर्पित” करता है। उन्होंने बताया कि अकादमी के पास वर्तमान में 1,100 से अधिक फेलो हैं, जिनमें भारत रत्न, पद्म भूषण और पद्मश्री से सम्मानित सदस्य शामिल हैं।
पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा, “संस्थान में निवेश किया गया हर रुपया रोगी सेवा में पचास गुना मूल्य लौटाता है — यह हमारी करुणा, दक्षता और समर्पण का प्रमाण है।” उन्होंने बताया कि 70% से अधिक मरीज आयुष्मान भारत के अंतर्गत आते हैं, और पात्र मरीजों के लिए किडनी, हार्ट और नी ट्रांसप्लांट निःशुल्क किए जाते हैं।
इस अवसर पर 45 विशिष्ट शिक्षाविदों को फेलोशिप, 100 पेशेवरों को सदस्यता और 14 नवोदित विशेषज्ञों को एसोसिएट फेलोशिप प्रदान की गई। इसके अलावा तीन महिला वैज्ञानिकों और सात प्रोफेसर एमेरिटस को चिकित्सा अनुसंधान और शिक्षा में आजीवन योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

दीक्षांत समारोह का आरंभ भव्य शैक्षणिक जुलूस से हुआ, जिसके उपरांत नए फेलो और सदस्यों ने चिकित्सा सेवा की शपथ दोहराई।
यह 65वां दीक्षांत समारोह चिकित्सा क्षेत्र में विज्ञान और सेवा, नवाचार और सहानुभूति, तथा ज्ञान और उद्देश्य के समन्वय का प्रतीक बनकर इतिहास में दर्ज हुआ।










