विशेषज्ञों ने स्लीप व एलर्जिक विकारों के प्रति जागरूकता और बहु-विषयक उपचार की आवश्यकता पर दिया बल
चंडीगढ़, 9 नवम्बर ,
हिम नयन न्यूज़/ब्यूरो/ वर्मा
पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर), चंडीगढ़ के कान, नाक एवं गला रोग विभाग (ओटोलरिंगोलॉजी, हेड एंड नेक सर्जरी) ने राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान अकादमी (भारत) – NAMS के तत्वावधान में “स्लीप-रिलेटेड ब्रीदिंग डिसऑर्डर्स (Sleep-Related Breathing Disorders – SRBD)” पर सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम (CME) और एलर्जी पर हैंड्स-ऑन वर्कशॉप का आयोजन किया। यह कार्यक्रम NAMSCON 2025 के 65वें वार्षिक सम्मेलन का हिस्सा रहा।

कार्यक्रम का समन्वय प्रो. संदीप बंसल, (विभागाध्यक्ष, ओटोलरिंगोलॉजी, पीजीआईएमईआर) द्वारा किया गया, जो एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त स्लीप सर्जन हैं।
इस आयोजन में देशभर के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों से आए विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। 4 पीएमसी क्रेडिट पॉइंट्स से मान्यता प्राप्त इस सीएमई में स्लीप डिसऑर्डर और एलर्जिक एयरवे रोगों के निदान व उपचार तकनीकों पर इंटरएक्टिव लेक्चर और डेमोंस्ट्रेशन आयोजित किए गए।
इस अवसर पर पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा, “नींद संबंधी विकार और श्वसन अवरोध एक मौन महामारी बन चुके हैं, जिनका प्रभाव स्वास्थ्य पर गहरा पड़ रहा है।
पीजीआईएमईआर में हमारा प्रयास अनुसंधान को आगे बढ़ाने, बहु-विषयक समझ विकसित करने और साक्ष्य-आधारित चिकित्सा को व्यवहार में लाने का है।”

प्रो. संदीप बंसल ने कहा कि “स्लीप डिसऑर्डर और एलर्जिक रोग अक्सर समय पर पहचान और उचित उपचार के अभाव में गंभीर रूप ले लेते हैं। ऐसे सीएमई और वर्कशॉप चिकित्सकों को नवीन तकनीकों और दृष्टिकोणों से सशक्त करते हैं ताकि वे रोगियों के जीवन की गुणवत्ता सुधार सकें।”
कार्यक्रम के शैक्षणिक सत्रों में पद्मश्री प्रो. मोहन कामेश्वरन (एमईआरएफ, चेन्नई), डॉ. राहुल मोदी (हिरानंदानी हॉस्पिटल, मुंबई), डॉ. विजयकृष्णन (एमईआरएफ, चेन्नई) और डॉ. श्रीनिवास किशोर (एआईजी, हैदराबाद) जैसे विशेषज्ञों ने ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA), अनिद्रा (Insomnia) और बाल रोग स्लीप विकारों पर अपने अनुभव साझा किए।

एलर्जी पर हैंड्स-ऑन वर्कशॉप, जिसकी अगुवाई प्रो. सत्यवती मोहिन्द्रा ने की, में स्किन प्रिक टेस्टिंग, फूड एलर्जी डायग्नोसिस, और यूनिफाइड एयरवे डिजीज के प्रबंधन पर व्यावहारिक प्रदर्शन किए गए। इस अवसर पर डॉ. शकुंतला लवासा और डॉ. नितिका गुप्ता ने एलर्जिक रोगों की नैदानिक विविधता और उपचार रणनीतियों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने के लिए पद्मश्री डॉ. दिगंबर बेहरा (अध्यक्ष, NAMS) और पद्मश्री डॉ. योगेश चावला (NAMS पर्यवेक्षक) उपस्थित रहे। उन्होंने पीजीआईएमईआर की शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान और चिकित्सा प्रशिक्षण में निरंतर योगदान की सराहना की।
कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों ने कहा कि पीजीआईएमईआर साक्ष्य-आधारित चिकित्सा शिक्षा, अंतःविषय सहयोग और रोगी-केंद्रित नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है — जो इस संस्थान की पहचान और विरासत का अभिन्न हिस्सा है।








