अदालत ने अग्रिम जमानत 27 नवंबर तक बढ़ाई
चम्बा 22 नवंबर,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो/ वर्मा
चंबा के चुराह विधायक डॉ. हंसराज को यौन शोषण के आरोपों से जुड़े मामले में एक बार फिर अदालत से राहत मिली है।
मिली जानकारी के मुताबिक शनिवार को हुई सुनवाई के बाद अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत अवधि बढ़ाकर 27 नवंबर तक कर दी है।
इससे पहले विधायक को 22 नवंबर तक की अंतरिम अग्रिम जमानत प्राप्त थी।
इस बात की पुष्टि करते हुए एएसपी चंबा हितेश लखनपाल ने बताया कि अग्रिम जमानत अवधि में विस्तार दिया गया है और अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी, जिसमें अदालत अंतिम निर्णय सुना सकती है।
याद रहे कि मामला तब चर्चा में आया था जब चंबा की एक युवती ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर डॉ. हंसराज पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए। उसके बाद युवती महिला थाना पहुंची और दिए गए बयान के आधार पर थाना चंबा में एफआईआर दर्ज की गई।
मामला दर्ज होने के बाद विधायक कुछ समय तक सार्वजनिक रूप से नहीं दिखाई दिए थे।
इस विवाद के बीच सोशल मीडिया पर एक कथित कॉल रिकॉर्डिंग वायरल हो रही है जिसमें एक युवती भावुक होकर आरोप लगाते सुनी जा रही है। हालांकि ऑडियो की प्रामाणिकता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस इसे केवल जांच के दायरे में मान रही है।
जांच के दौरान मंडी जिला के एक अन्य भाजपा विधायक का नाम भी सामने आया है। पुलिस की जांच में यह तथ्य सामने आया कि जिस तिथि को कथित शोषण की बात कही गई है, उसी तिथि को चंडीगढ़ के एक होटल की बुकिंग उस भाजपा विधायक के नाम पर दर्ज मिली, जिसमें डॉ. हंसराज ठहरे थे।
महिला थाना चंबा की टीम ने संबंधित भाजपा विधायक से करीब छह घंटे तक पूछताछ की, हालांकि फिलहाल उनके विरुद्ध कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि चंडीगढ़ के दो अलग-अलग होटलों में दो अलग-अलग मौकों पर की गई बुकिंग उसी विधायक के नाम पर थी और दोनों बार डॉ. हंसराज उन्हीं कमरों में ठहरे। पुलिस दोनों होटलों के रजिस्टर व रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले चुकी है।
जांच में सामने आए तथ्यों के बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि होटल बुकिंग दूसरे नाम पर क्यों की गई और क्या यह पहचान छिपाने का प्रयास था।
इस संबंध में पुलिस तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों की गहन जांच कर रही है। दोनों विधायकों के पुराने संबंध इस मामले को और जटिल बना रहे हैं।
मामला अभी न्यायिक और पुलिस जांच के अधीन है, इसलिए लगाए गए आरोप सिद्ध मानना उचित नहीं होगा। अदालत और जांच एजेंसियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविकता सामने आएगी।







