/डिजिटल युग में पत्रकारिता का बदलता स्वरूप और घटता विश्वसनीयता स्तर।

डिजिटल युग में पत्रकारिता का बदलता स्वरूप और घटता विश्वसनीयता स्तर।

नई दिल्ली 28 नवम्बर,
हिम नयन न्यूज/ ब्यूरो

देश में तेज़ी से बढ़ती डिजिटल प्रगति ने समाज के हर क्षेत्र को प्रभावित किया है, जिसमें पत्रकारिता भी शामिल है। जहां डिजिटल तकनीक ने समाचारों के प्रसार को सरल बनाया है, वहीं इसके चलते पारंपरिक पत्रकारिता की विश्वसनीयता और स्तर पर गंभीर सवाल भी उठने लगे हैं।

आज ब्लॉगर्स और यूट्यूबर्स बड़ी संख्या में उभरकर सामने आए हैं, जिन्होंने सूचना प्रसारण को एक नई दिशा दी है। इन प्लेटफॉर्मों पर व्यक्तिगत समझ, विचार और परिस्थितियों के आधार पर सामग्री प्रस्तुत की जाती है, जिसका प्रभाव व्यापक है। इसके कारण सोशल मीडिया पर हर विषय तेजी से प्रसारित हो जाता है, भले ही उसकी तथ्यात्मक पुष्टि आवश्यक न की गई हो।

मीडिया विशेषज्ञों का कहना है कि पारंपरिक मीडिया हाउस अपनी साख और विश्वसनीयता बनाए रखने की चुनौती से जूझ रहे हैं। पत्रकारिता में पक्षपात का आरोप नया नहीं है, लेकिन सोशल मीडिया ने इसकी तीव्रता और दृश्यता दोनों को बढ़ा दिया है। राजनीति, समाज और विचारधाराओं के प्रभाव ने कई बार समाचार और राय के बीच की रेखा को धुंधला कर दिया है।

डिजिटल प्लेटफार्मों के विस्तार के साथ लोगों ने सोशल मीडिया को अपने-अपने एजेंडे के प्रचार-प्रसार का प्रमुख माध्यम बना लिया है। परिणामस्वरूप, सूचना का प्रवाह तो बढ़ा है, लेकिन तथ्य, संतुलन और सत्यापन जैसे मूल पत्रकारिता गुणों पर दबाव बढ़ा है।

विशेषज्ञों के अनुसार प्रिंट मीडिया भी अपने अस्तित्व की चुनौती से गुजर रहा है। डिजिटल सामग्री की आसान उपलब्धता और बदलते पाठक वर्ग के कारण प्रिंट माध्यम की पहुंच सीमित होती जा रही है।

हालांकि, अभी भी एक छोटा वर्ग ऐसा बचा है जो विश्वसनीय और तथ्य-आधारित समाचार के लिए पारंपरिक मीडिया पर भरोसा करता है।

पत्रकारिता जगत में यह बदलाव समय की मांग भी है और चुनौती भी। विश्वसनीयता, निष्पक्षता और तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग को पुनः स्थापित करना ही आधुनिक पत्रकारिता के सामने सबसे बड़ी आवश्यकता है।