/हिमालय में ग्लेशियरों का पिघलना और बाडी धार क्षेत्र में पाजा (वाइल्ड चेरी) के सूखने से बढ़ी चिंता

हिमालय में ग्लेशियरों का पिघलना और बाडी धार क्षेत्र में पाजा (वाइल्ड चेरी) के सूखने से बढ़ी चिंता

बदलता तापमान और वनस्पति पर प्रभाव:

शिमला 7 दिसम्बर,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो /वर्मा।

वैश्विक स्तर पर बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन का प्रभाव अब हिमालयाई क्षेत्रों की वनस्पति पर भी साफ दिखाई देने लगा है।

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार मौसमी बदलाव का असर हिमालय रेंज, शिमला हिल्स तथा बाडी धार जैसे ऊपरी इलाकों के पेड़-पौधों पर गंभीर रूप से पड़ रहा है।

नेचर लविंग एंड डेवलपमेंट सोसाइटी के अनुसार बाडी धार क्षेत्र में पाये जाने वाले पाजा (वाइल्ड चेरी) के पेड़ बदलते तापमान की मार से नहीं बच पाए हैं। सरयांज पंचायत के सभी गांवों में पहले हरे-भरे रहने वाले पाजा के पेड़ अब तेजी से सूख रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों में गहरी चिंता व्याप्त है।

ग्रामीणों का कहना है कि पाजा का उपयोग वर्षों से पशुओं के लिए चारे तथा चेरी की ग्राफ्टिंग (कलम) बनाने में किया जाता था, लेकिन पिछले दो वर्षों से अधिकांश गांवों में ये पेड़ लगातार सूखते देखे जा रहे हैं।

लोगों का कहना है कि यह समस्या केवल स्थानीय नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन का बड़ा संकेत है।

पर्यावरणविदों का मानना है कि हिमालय में बढ़ते तापमान के कारण जहां ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इससे पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र में असंतुलन पैदा हो रहा है।

वनस्पति में हो रहे ऐसे बदलाव भविष्य में गंभीर पर्यावरणीय खतरे की ओर संकेत कर रहे हैं। यहां बढ़ते अवैज्ञानिक विकासात्मक गतिविधियां, वैध अवैध स्टोन क्रशर्ज से लेकर वैध अवैध काटन तक की कई शिकायतें सरकार के पास ठंडे बस्ते में पड़ी बताई जा रही है।

स्थानीय स्वयंसेवी संगठनों ने सरकार एवं संबंधित विभागों से अपील की है कि हिमालयी क्षेत्रों में बदलते मौसम और गिरते पर्यावरणीय संतुलन पर अधिक ध्यान देकर वैज्ञानिक अध्ययन और संरक्षण के ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संपदा को सुरक्षित रखा जा सके।