/नेता, बाबा और बलात्कार— एक राजनीतिक-सामाजिक व्यंग्य

नेता, बाबा और बलात्कार— एक राजनीतिक-सामाजिक व्यंग्य

सोलन 31 दिसंबर
हिम नयन न्यूज/ ब्यूरो/लेखक: मनमोहन सिंह

आज के हालात पर नज़र डालें तो नेता, बाबा और बलात्कार के बीच एक अजीब-सा भाईचारा दिखाई देता है। बलात्कार अब कोई जघन्य अपराध नहीं, बल्कि कुछ नेताओं और बाबाओं के लिए एक स्वाभाविक क्रिया जैसा प्रतीत होता है।


इसी सोच के चलते जब एक नेता को दोषी पाए जाने के बावजूद सज़ा सुनाए जाने के बाद भी ‘देशहित’ में ज़मानत दे दी जाती है, तो किसी को आश्चर्य नहीं होता। हाईकोर्ट ने मानो यह सोच लिया हो कि जेल में रहकर देश सेवा संभव नहीं। पर अफ़सोस, कुछ जागरूक लोग सर्वोच्च न्यायालय पहुँच गए और बेचारे नेता जी की ज़मानत रद्द करवा दी।


अब भला किसी ने यह नहीं सोचा कि देश कैसे चलेगा?
ठीक है, उनसे अनजाने में बलात्कार हो गया — यह भी तब, जब महिला ने इनकार कर दिया। गलती तो महिला की ही मानी जाएगी। आखिर नेता जी के पास और भी बहुत काम हैं। इस छोटी-सी भूल के लिए उन्हें देश सेवा से वंचित करना कहां का न्याय है?


वैसे भी, जब ऐसे नेता जेल से बाहर आते हैं तो उनके देशभक्त समर्थक फूल-मालाओं के साथ स्वागत करते हैं, मानो स्वतंत्रता संग्राम के कोई क्रांतिकारी लौट रहे हों। नारों की गूंज कुछ यूं होती है जैसे कहा जा रहा हो—
“तुम बलात्कार पर बलात्कार करो, हम तुम्हारे साथ हैं।”
देश का कल्याण इन ‘महापुरुषों’ के बिना कैसे होगा? शायद इसी कारण हर चुनाव के समय एक ऐसे बाबा को — जो बलात्कार और हत्या के मामलों में उम्रकैद की सज़ा काट रहा होता है — लंबी पैरोल पर बाहर भेज दिया जाता है।

आखिर देश भी तो चलाना है।
इसलिए अब तो लगता है कि ऐसे बाबाओं और नेताओं को कानूनी तौर पर एक-दो बलात्कार और एक-दो हत्याओं की विशेष अनुमति दे देनी चाहिए। इससे वे निडर होकर काम कर पाएंगे। वैसे भी, अपराधी होना, बलात्कारी होना या खूनी होना आज समाज की नज़रों में कोई बड़ी बात नहीं रही।


जेलों में बंद होने के बावजूद इनके चेले-चपाटों की संख्या घट नहीं रही। महिलाएं इनके नामों की तख्तियां और तस्वीरें उठाए सड़कों पर स्तुति-गान करती नज़र आती हैं। नेता और नौकरशाह इनके दरबारों में सिर झुकाते आम दिखते हैं।


ऐसे में सवाल उठता है—
क्या इन ‘महापुरुषों’ को बलात्कार और हत्या जैसे मामलों में छूट नहीं मिलनी चाहिए?
क्या इन्हें आम बलात्कारी की श्रेणी में रखना वाकई उचित होगा?