बद्दी 31 दिसम्बर,
हिम नयन न्यूज़ /ब्यूरो /वर्मा
हिमाचल प्रदेश में फार्मास्यूटिकल इकाइयों के बंद होने को लेकर चल रही खबरों पर Drugs Control Administration ने स्पष्ट किया है कि कुछ मीडिया व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित की जा रही सूचनाएं तथ्यात्मक रूप से गलत हैं।
राज्य के चीफ ड्रग कंट्रोलर Dr. Manish Kapoor द्वारा जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि यह दावा निराधार है कि संशोधित शेड्यूल-एम के अनुपालन न होने के कारण 80 से अधिक दवा निर्माण इकाइयों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं।

डॉ. मनीष कपूर ने बताया कि Central Drugs Control Organization के सहयोग से राज्य में जोखिम-आधारित निरीक्षण (Risk Based Inspections) की प्रक्रिया जारी है।
उन्होंने बताया कि निरीक्षण के दौरान कमियां पाए जाने पर संबंधित इकाइयों को सुधार के लिए अस्थायी रूप से उत्पादन रोकने के निर्देश दिए जाते हैं, और अनुपालन सत्यापन के बाद ही उत्पादन पुनः शुरू करने की अनुमति दी जाती है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ इकाइयों ने मरम्मत अथवा नवीनीकरण के चलते स्वयं उत्पादन अस्थायी रूप से बंद किया है। अब तक जिन दवा निर्माण इकाइयों के लाइसेंस वास्तव में सरेंडर या रद्द हुए हैं, उनकी संख्या 10 से अधिक नहीं है।
चीफ ड्रग कंट्रोलर ने जनता और मीडिया से अपील की है कि वे भ्रामक खबरों से बचें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।








