MIS योजना में संभावित महा घोटाला, कांग्रेस सरकार का बागवानी मॉडल पूरी तरह फेल : संदीपनी भारद्वाज
शिमला 5 जनवरी,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो/ वर्मा
भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने हिमाचल प्रदेश सरकार की मंडी मध्यस्थता योजना (MIS) में सामने आ रही गंभीर अनियमितताओं और संभावित घोटाले को लेकर कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का नहीं, बल्कि किसानों के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग और एक बड़े संगठित घोटाले की ओर इशारा करता है। यह पूरी तरह से कांग्रेस सरकार का फेलियर है।
संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि सरकारी उपक्रम हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पाद विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (HPMC) द्वारा MIS के तहत सेब की खरीद में प्रिक्योरमेंट असिस्टेंट स्तर पर गड़बड़ी सामने आना अत्यंत गंभीर विषय है। रोहड़ू के चिड़गांव खरीद केंद्र में अनियमितताओं के बाद एफआईआर दर्ज होना इस बात का प्रमाण है कि मामला केवल संदेह तक सीमित नहीं, बल्कि ठोस गड़बड़ी का है। अन्य खरीद केंद्रों में भी अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है, जिससे पूरा सिस्टम सवालों के घेरे में आ गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि गड़बड़ी सामने आने के बाद अब SDM और तहसीलदार की अध्यक्षता में कमेटियों का गठन करना सरकार की पहले से चली आ रही लापरवाही और कमजोर निगरानी को छिपाने का प्रयास है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सेब की खरीद चल रही थी, तब ऐसी कमेटियों की आवश्यकता क्यों नहीं पड़ी। अब रिपोर्टों का इंतजार कर सरकार केवल समय निकालने का प्रयास कर रही है।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि MIS की पेमेंट के लिए बागवानों से आधार कार्ड, उद्यान कार्ड और भूमि दस्तावेज अनिवार्य करना किसानों के साथ सीधा अन्याय है। जब उद्यान कार्ड में पहले ही जमीन, बागवानी क्षेत्र और उत्पादन से जुड़ी पूरी जानकारी दर्ज है, तो बार-बार दस्तावेज मांगकर ईमानदार किसानों को शक के दायरे में क्यों लाया जा रहा है। यह सरकार की नाकामी को छिपाने की कोशिश है।
संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि इस वर्ष MIS के तहत 98,500 मीट्रिक टन से अधिक सेब की खरीद ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। वर्ष 2023 में, जब प्राकृतिक आपदा और नुकसान कहीं अधिक था, तब लगभग 80 हजार मीट्रिक टन सेब की खरीद हुई थी। इस वर्ष पैदावार लगभग समान होने के बावजूद रिकॉर्ड खरीद होना संदेह पैदा करता है। सड़कों के बंद होने के कारण सेब खराब होने का सरकार का तर्क भी तर्कसंगत नहीं लगता।
उन्होंने आरोप लगाया कि मानसून के दौरान सड़कों के लंबे समय तक बंद रहने की आड़ में कई खरीद केंद्रों पर अनियमितताएं की गईं। सूत्रों के अनुसार, जितना सेब वास्तव में खरीदा गया, उससे कहीं अधिक का बिल तैयार किया गया। कई क्षेत्रों में वास्तविक उत्पादन से अधिक सेब की एंट्री दिखाई गई, जबकि परिवहन की स्थिति ही संभव नहीं थी। यह पूरे MIS सिस्टम में संगठित गड़बड़ी की ओर संकेत करता है।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि HPMC के अनुसार इस वर्ष लगभग 40 हजार बागवानों ने MIS योजना के तहत सेब दिया है और करीब 115 करोड़ रुपये की खरीद की गई है। इतने बड़े स्तर पर एफआईआर दर्ज होना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि मामला अत्यंत गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
उन्होंने बागवानी मंत्री के बयानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सब कुछ पारदर्शी था, तो एफआईआर दर्ज करने की जरूरत क्यों पड़ी। यदि केवल एक-दो केंद्रों पर ही गड़बड़ी थी, तो पूरे प्रदेश के बागवानों से दस्तावेज क्यों मंगवाए जा रहे हैं। यह किसानों को डराने और दबाव में लेने की कोशिश है।
संदीपनी भारद्वाज ने मांग की कि MIS योजना के अंतर्गत हुई पूरी खरीद की उच्चस्तरीय, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच करवाई जाए, दोषी अधिकारियों और प्रिक्योरमेंट असिस्टेंट्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो तथा ईमानदार बागवानों को तुरंत राहत दी जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कांग्रेस सरकार ने इस मामले को दबाने या लीपापोती करने का प्रयास किया, तो भारतीय जनता पार्टी किसानों के हित में सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करने से पीछे नहीं










