एचपीएमसी मुख्यालय घेरकर कांग्रेस सरकार व कुप्रबंधन के खिलाफ खोला मोर्चा।
शिमला 6 जनवरी,
हिम नयन न्यूज़/ब्यूरो/ वर्मा।
सेब उत्पादकों ने भाजपा नेता चेतन सिंह बरागटा के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार की किसान-विरोधी नीतियों, सेब एमआईएस योजना में कथित भारी अनियमितताओं, किसानों के उत्पीड़न तथा हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पाद विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (HPMC) के गंभीर कुप्रबंधन के खिलाफ एचपीएमसी मुख्यालय, शिमला के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया।

इस दौरान बागवानों ने एचपीएमसी के प्रबंध निदेशक को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उद्यान कार्ड होने के बावजूद किसानों से बार-बार राजस्व दस्तावेज मांगे गए, जबकि उद्यान कार्ड में बागवानी से संबंधित संपूर्ण जानकारी पहले से दर्ज होती है। इससे किसानों को अनावश्यक परेशानियों के साथ-साथ भुगतान में देरी और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा।
सेब उत्पादकों ने एचपीएमसी पर गंभीर कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए कहा कि कई क्षेत्रों में कलेक्शन सेंटर समय पर नहीं खोले गए, दैनिक लिफ्टिंग की सीमा तय कर दी गई और सड़क सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद ट्रक नहीं भेजे गए। इसके चलते लगभग ₹20 करोड़ मूल्य के सेब सड़ने का दावा किया गया।
प्रदर्शन के दौरान पर्यावरणीय खतरे का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। आरोप है कि सड़े हुए सेबों को बिना निर्धारित प्रक्रिया और पर्यावरणीय आकलन के डंप किया गया, जिससे पर्यावरण व जनस्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा।
एमआईएस योजना को लेकर यह भी आरोप लगाया गया कि विश्व बैंक द्वारा वित्तपोषित ऑनलाइन मॉड्यूल को जानबूझकर लागू नहीं किया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। अब तक न तो अंतिम खरीद आंकड़े सार्वजनिक किए गए हैं और न ही वास्तविक नुकसान की स्थिति स्पष्ट की गई है।
भाजपा नेताओं ने बताया कि एचपीएमसी की वित्तीय स्थिति बेहद चिंताजनक है। निगम के पास लगभग 4,000 मीट्रिक टन बिना बिका सेब जूस कंसंट्रेट पड़ा है, जिसकी अनुमानित कीमत ₹48 करोड़ बताई जा रही है, जबकि एचपीएमसी पहले से ही करीब ₹80 करोड़ के घाटे में चल रहा है।
इस अवसर पर भाजपा ने मांग की कि पूरे मामले की तत्काल विजिलेंस जांच करवाई जाए, सेब की बर्बादी, वित्तीय नुकसान और पर्यावरणीय उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।
वर्ष 2023 में सेब फेंकने के आरोप में जिन बागवानों पर जुर्माना लगाया गया था, वह राशि वापस की जाए, एमआईएस के तहत लंबित भुगतान तुरंत जारी किए जाएं तथा स्प्रे ऑयल, खाद, उर्वरक और अन्य आवश्यक इनपुट्स शीघ्र उपलब्ध कराए जाएं।
भाजपा ने स्पष्ट चेतावनी दी कि कांग्रेस सरकार की लापरवाही, अव्यवस्था और किसान-विरोधी रवैये के कारण हिमाचल की बागवानी और सेब अर्थव्यवस्था को गहरी चोट पहुंची है। यदि मांगें शीघ्र पूरी नहीं की गईं, तो इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक पूरी मजबूती के साथ उठाया जाएगा।









