/सच का सामना//औद्योगिक नगरी राजनीति की भेंट, विकास से ज़्यादा विनाश की राह।

सच का सामना//औद्योगिक नगरी राजनीति की भेंट, विकास से ज़्यादा विनाश की राह।

बीबीएन में योजनाएं अटकी, लाभ उठा रहे पड़ोसी राज्य—जनता के हिस्से प्रदूषण,चोरी, अपराध और दुर्घटनाएं।

बद्दी 7 जनवरी,
हिम नयन न्यूज़/ब्यूरो/ वर्मा

किसी विकासशील देश या क्षेत्र की राजनीति में जब सेवा-भाव खत्म होकर “तू सेर, मैं सवा सेर” का रवैया हावी हो जाता है, तब विकास नहीं—विनाश तय हो जाता है। औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन इसका जीता-जागता उदाहरण बनता दिख रहा है।


फार्मा हब होने के बावजूद बीबीएन में व्यवस्थित विकास का अभाव रहा। नतीजा—उद्योगों का वास्तविक लाभ हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ जैसे पड़ोसी क्षेत्रों को मिला, जबकि स्थानीय जनता के हिस्से प्रदूषण और अव्यवस्था आई। कुछ प्रॉपर्टी कारोबारियों को छोड़ दें, तो आम नागरिक की झोली खाली ही रही।

नालागढ़ में मेडिकल डिवाइस पार्क पर केंद्र सरकार के निवेश की उम्मीदें थीं, लेकिन प्रदेश में सरकार बदलते ही परियोजना पर ग्रहण लग गया। कारण चाहे जो रहे हों, पर विकास की रफ्तार थम गई और आज स्थिति “सब गुड़-गोबर” जैसी नज़र आती है।

हाल ही में वर्तमान सरकार और स्थानीय विधायक के प्रयासों से इस क्षेत्र को “मिनी चंडीगढ़” के रूप में विकसित करने की घोषणाएं हुईं, तो विरोध भी शुरू हो गया। आशंका यही है कि यह व्यवस्थित विकास परियोजना भी अदालतों की भेंट चढ़ेगी—मामले वर्षों लटकेंगे और बीच-बीच में मौके के हिसाब से आंशिक, बेतरतीब विकास होता रहेगा; जैसा पहले भी बीबीएन में देखा गया है।


नतीजा—सड़कों की बदहाली, उद्योगों और रिहायशी इलाकों में अव्यवस्था चोरी चुकारी सड़कों की दयनीय हालत दुर्घटनाएं।


बद्दी के शीतलपुर को चंडीगढ़ की तर्ज पर विकसित करने की घोषणा के साथ ही विरोध शुरू हो जाना इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में यहां का समग्र, योजनाबद्ध विकास अधर में लटक सकता है।

कुल मिलाकर, औद्योगिक नगरी राजनीति की भेंट चढ़ती दिख रही है। मामले लटकते रहेंगे, मलाई कोई और उड़ाएगा, और जनता—हमेशा की तरह—मोहरा बनती रहेगी।

कारण जो भी हों, पर राजनीति के चलते विकास के मुद्दों पर जनता भटकती ही रहेगी।