सोलन 20 जनवरी,
हिम नयन न्यूज/ब्यूरो— मनमोहन सिंह
मैं अनपढ़ हूं। इसीलिए सुखी हूं। पढ़ा लिखा होता तो दुखी होता। मुझे चिंता होती अपनी अर्थव्यवस्था की, डॉलर की, रुपए की गिरती कीमत की। पर मुझे क्या, मैने तो न कभी डॉलर देखा न कभी देखना है। फिर हमारे एक माननीय सांसद ने मुझे समझाया कि तूने डॉलर का आचार डालना है। तेरी जेब में तो अपने देश का रुपया ही रहना है। सब्जी वाले को भी रुपया ही देना है । मैं समझ गया कि डॉलर और मेरा कोई रिश्ता नहीं। अगर पढ़ा लिखा होता तो अखबार पढ़ कर डॉलर को ले कर परेशान होता। लोग शोर मचा रहे हैं कि लगभग 90 हज़ार सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए और 42 हज़ार प्राइवेट स्कूल खोल दिए गए।
अरे भाई जो बात मैं अनपढ़ गवार समझ रहा हूं वह पता नहीं क्यों आप पढ़े लिखे लोग नहीं समझ पा रहे। अब सरकारी स्कूल बंद होंगे तभी तो प्राइवेट स्कूल चलेंगे। जैसे बी एस एन अल को कमज़ोर किया तभी तो जियो चल पाया। नहीं जियो का मालिक भूखा न मर जाता।
उसकी रोज़ी रोटी चलने की लिए सरकार को ऐसे कदम उठाने पड़े। आखिर हम वेलफेयर स्टेट हैं। फिर हमें भी तो पांच किलो राशन मुफ्त में मिल रहा है ना। महिलाओं को 1500- 1500 रुपए मिल रहे हैं। भगवान भला करे चुनावों का महिलाओं को दस दस हज़ार रुपए भी मिले। आगे भी चुनाव आते रहेंगे और हमारा काम चलता रहेगा। अब ऐसे में अगर कोई आदमी सरकार की आलोचना करे यानि हमारे पेट पर लात मारे तो उसे जेल में ही होना चाहिए। और सरकार ऐसा कर भी रही है।आप ही बताइए कि किसी राजनीतिक पार्टी के खाते में अगर दस हज़ार करोड़ हैं तो मुझे क्या? पड़े रहें।
पढ़े लिखे लोग पता नहीं क्यों ऐसी फ़िज़ूल बातों के पीछे पड़े रहते हैं। उन्हें कोई और काम नहीं है क्या?
अब स्कूल बंद हुए दो करोड़ बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी। अब ये दो करोड़ बच्चे दिहाड़ी, मज़दूरी, चोरी चकारी, जैसे काम कर लेंगे, मतलब दस बारह साल की उम्र से रोज़गार पा लेंगे। इनके माता पिता को स्कूल फीस, किताबों, कापियों के खर्चे से मुक्ति और ऊपर से आमदनी। चुनाव के दिनों में सियासी दल इन्हें पैसे दे कर अपनी चुनावी रैलियों में भी ले जाएंगे। पढ़ाई लिखाई में क्या रखा है।
इतना ही नहीं अगर आप हमारे रहनुमाओं, नेताओं, मंत्रियों, वगैरा को देखो वे अनपढ़ता का साइनबोर्ड नज़र आते हैं। उन्हें फ़ाइल समझ में आए न आए पर पैसा कैसे कमाना है, वे अच्छी तरह जानते हैं।
तो हजूर मेरी अनपढ़ता ही मेरा सरमाया है इसे मुझसे कोई नहीं छीन सकता। हो सकता है कल मैं कहीं विधायक या मंत्री की कुर्सी पर नज़र आऊं। तब आप सोचोगे की काश आप भी अनपढ़ होते।








