/सेल्फोस जहर के इलाज में पीजीआईएमईआर के डॉक्टरों को बड़ी सफलता।

सेल्फोस जहर के इलाज में पीजीआईएमईआर के डॉक्टरों को बड़ी सफलता।

चंडीगढ़, 31 जनवरी,
हिम नयन न्यूज़/ब्यूरो/ वर्मा

पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER), चंडीगढ़ के डॉक्टरों ने सेल्फोस (एल्युमिनियम फॉस्फाइड) जहर के इलाज में एक बड़ी चिकित्सीय उपलब्धि हासिल की है। आंतरिक चिकित्सा विभाग में किए गए इस अध्ययन में पहली बार यह साबित हुआ है कि इंट्रावीनस लिपिड इमल्शन थेरेपी इस जानलेवा जहर के मामलों में जीवनरक्षक साबित हो सकती है।

इस महत्वपूर्ण शोध के निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय जर्नल European Review of Medical and Pharmacological Sciences में प्रकाशित हुए हैं, जिससे उत्तर भारत की एक गंभीर जन-स्वास्थ्य समस्या पर किए गए शोध को वैश्विक पहचान मिली है। अध्ययन प्रो. संजय जैन, डीन (अकादमिक्स) एवं विभागाध्यक्ष, आंतरिक चिकित्सा के मार्गदर्शन में किया गया।

शोध का वित्तपोषण मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च सेल (MERC), पीजीआईएमईआर द्वारा किया गया।

रैंडमाइज्ड क्लीनिकल स्टडी के प्रमुख अन्वेषक डॉ. मंदीप सिंह भाटिया (एसोसिएट प्रोफेसर, आंतरिक चिकित्सा) रहे, जबकि डॉ. सौरभ चंद्रभान शारदा सह-अन्वेषक थे।

अध्ययन में पाया गया कि मानक उपचार के साथ लिपिड इमल्शन देने से मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई, गंभीर मेटाबोलिक एसिडोसिस में तेजी से सुधार हुआ और हृदय व शॉक से ग्रस्त मरीजों के परिणाम बेहतर रहे।

शोधकर्ताओं के अनुसार इस उपचार की खास बात इसकी कम लागत और व्यापक उपलब्धता है, जिससे ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में भी इससे कई जानें बचाई जा सकती हैं।

पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे कृषि प्रधान राज्यों में सेल्फोस विषाक्तता एक बड़ी समस्या है।

ऐसे में यह शोध जन-स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।