शिमला 4 फरवरी,
हिम नयन न्यूज़/ब्यूरो/वर्मा
हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने भारत-अमेरिका संभावित व्यापार समझौते के तहत कृषि उत्पादों पर ज़ीरो आयात शुल्क की संभावना पर गंभीर चिंता जताई है।
उन्होंने कहा कि इस तरह का कोई भी निर्णय बिना व्यापक सार्वजनिक विमर्श, संसद में चर्चा और किसानों के प्रतिनिधि संगठनों से संवाद के लिया गया, तो यह देश के करोड़ों किसानों, बागवानों और कृषि श्रमिकों के हितों के साथ सीधा विश्वासघात होगा।

उन्होंने कहा कि भारत की कृषि व्यवस्था आज भी छोटे और सीमांत किसानों पर आधारित है, जिन्हें विकसित देशों की भारी सब्सिडी प्राप्त कॉरपोरेट कृषि से प्रतिस्पर्धा के लिए मजबूर करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। यदि अमेरिकी अनाज, दलहन, तिलहन, फल-सब्ज़ियां और डेयरी उत्पाद कम या शून्य शुल्क पर भारतीय बाजार में आते हैं, तो इससे घरेलू कीमतों में गिरावट, किसानों की आय में कमी और ग्रामीण बेरोज़गारी की समस्या और गहराएगी।
विक्रमादित्य सिंह ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने अब तक न तो इस कथित समझौते का कोई आधिकारिक मसौदा सार्वजनिक किया है और न ही यह स्पष्ट किया है कि किन कृषि उत्पादों को ज़ीरो टैरिफ के दायरे में लाया जा रहा है।
एक ओर अमेरिका अपने किसानों को इस समझौते के लाभ का भरोसा दिला रहा है, वहीं भारत सरकार की चुप्पी किसानों को असुरक्षित स्थिति में छोड़ रही है।
उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते पर संसद में विस्तृत चर्चा, राज्यों के मुख्यमंत्रियों से परामर्श और किसान संगठनों की भागीदारी अनिवार्य है।

पारदर्शिता के अभाव में लिया गया कोई भी निर्णय संघीय ढांचे और किसानों के हितों दोनों को कमजोर करेगा।
मंत्री ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने शीघ्र स्पष्टता और संवाद की प्रक्रिया शुरू नहीं की, तो इसके दूरगामी दुष्परिणाम किसानों की आय, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता पर पड़ेंगे।








