चंडीगढ़, 5 फरवरी ,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो/ वर्मा
पीजीआईएमईआर (PGIMER) और पंजाब विश्वविद्यालय की संयुक्त टीम ने हीटवेव और मृत्यु दर के बीच मजबूत संबंध स्थापित करने वाली महत्वपूर्ण रिसर्च की है।
यह अध्ययन प्रतिष्ठित जर्नल नेचर साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित हुआ है, जिसमें चंडीगढ़ में अत्यधिक तापमान के दौरान बढ़ती मौतों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया गया है।
अध्ययन का नेतृत्व पीजीआईएमईआर के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग और स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रोफेसर डॉ. रविंद्र खैवाल ने किया। शोध टीम में प्राची चौहान, संजीव भारद्वाज, अभिषेक कुमार और पंजाब यूनिवर्सिटी की प्रो. डॉ. सुमन मोर शामिल रहीं।
33.8°C के बाद तेजी से बढ़ती है मृत्यु दर
शोध में वर्ष 2010 से 2015 तक के दैनिक मृत्यु आंकड़ों और मौसम संबंधी रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया।

अध्ययन के अनुसार 33.8 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान होने पर चंडीगढ़ में दैनिक मृत्यु दर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। इस सीमा के पार तापमान बढ़ने पर मृत्यु दर में लगभग 4.1% तक वृद्धि पाई गई।
रिसर्च में पाया गया कि 65 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में हीटवेव के दौरान मृत्यु का खतरा सामान्य आबादी से 1.5 गुना अधिक है। अध्ययन अवधि में औसतन पुरुषों में प्रतिदिन 9 और महिलाओं में 6 मौतें दर्ज हुईं, हालांकि हीटवेव के दौरान जोखिम दोनों में समान रूप से बढ़ा।
शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि रीयल-टाइम मृत्यु डेटा के साथ हीट एक्शन प्लान तैयार किए जाएं, ताकि वार्ड स्तर पर संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर समय रहते बचाव उपाय किए जा सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अध्ययन बढ़ते तापमान और जनस्वास्थ्य के बीच संबंध को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और भविष्य की स्वास्थ्य नीतियों के लिए दिशा तय करेगा।







