पेंशनरों के प्रदर्शन पर कांग्रेस सरकार पर बरसे विपिन सिंह परमार।
शिमला, 17 फरवरी,
हिम नयन न्यूज़/ब्यूरो/वर्मा
वरिष्ठ भाजपा नेता, प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष एवं विधायक विपिन सिंह परमार ने शिमला के ऐतिहासिक चौड़ा मैदान में पेंशनरों के प्रदर्शन को प्रदेश सरकार की विफलताओं का प्रमाण बताते हुए कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है।
मीडिया से बातचीत में विपिन सिंह परमार ने कहा कि बजट सत्र के दूसरे दिन पेंशनरों को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरना पड़ा, जो सरकार की संवेदनहीनता और प्रशासनिक जड़ता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने अपना पूरा जीवन प्रदेश की सेवा में लगाया, आज वही अपने वैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं, जो लोकतांत्रिक शासन के लिए शर्मनाक स्थिति है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा परिसर के बाहर पेंशनरों द्वारा पारंपरिक ‘नाटी’ के माध्यम से दर्ज कराया गया विरोध केवल सांस्कृतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि व्यवस्था के प्रति गहरे असंतोष का प्रतीक है। जब बुजुर्ग पेंशनर भी सड़कों पर उतरकर सरकार को जगाने का प्रयास करें, तो यह स्पष्ट है कि शासन जनभावनाओं से कट चुका है।
सरकार पर प्रशासनिक और वित्तीय अव्यवस्था के आरोप
विपिन सिंह परमार ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार प्रशासनिक शिथिलता, वित्तीय अव्यवस्था और नीतिगत अनिर्णय की प्रतीक बन चुकी है। उन्होंने कहा कि पेंशनरों की मांगों पर सरकार का रवैया टालमटोल भरा है और बार-बार आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन ठोस निर्णय नहीं लिए जा रहे।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। विकास कार्य ठप हैं, योजनाएं कागजों में सिमट चुकी हैं और कर्मचारी वर्ग निराश है। पेंशनरों के लंबित डीए और अन्य वित्तीय लाभ रोके रखना उनके अधिकारों का हनन है।
परमार ने कहा कि यदि वित्त सचिव ‘सहारा योजना’ और बिजली-पानी जैसी सेवाओं पर दी जा रही सब्सिडी बंद करने की बात कर रहे हैं, तो यह सरकार की आर्थिक विफलता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि जो सरकार राहत देने के नाम पर सत्ता में आई थी, वही अब जनता से राहत छीनने की तैयारी कर रही है।
आरडीजी के मुद्दे पर भी उन्होंने सरकार से स्पष्ट नीति बताने की मांग की और कहा कि दोहरे मापदंड जनता के बीच भ्रम और अविश्वास पैदा करते हैं।
विपिन सिंह परमार ने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी बढ़ रही है, युवा अवसरों के अभाव में निराश हैं और कर्मचारी व पेंशनर असंतोष में हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ठोस और समयबद्ध फैसले नहीं लिए, तो भाजपा सड़क से सदन तक व्यापक जनांदोलन छेड़ेगी।
उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल अधिकारों की बहाली का नहीं, बल्कि पारदर्शी और जवाबदेह शासन की पुनर्स्थापना का है।









