/देश में प्रॉपर्टी बाजार पर दलालों का बढ़ता दबदबा, आम खरीदार और विक्रेता दोनों परेशान।

देश में प्रॉपर्टी बाजार पर दलालों का बढ़ता दबदबा, आम खरीदार और विक्रेता दोनों परेशान।

मार्केट वैल्यू से कम में बिकती संपत्तियां, ऊंची कीमत पर खरीदने को मजबूर आम जनता

नई दिल्ली 25 मार्च,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो /वर्मा

देशभर में रियल एस्टेट बाजार को लेकर एक चिंताजनक स्थिति सामने आ रही है, जहां प्रॉपर्टी डीलर्स और बिचौलियों का दबदबा लगातार बढ़ता जा रहा है। छोटे कस्बों से लेकर बड़े महानगरों तक, संपत्तियों की खरीद-फरोख्त में इन दलालों की भूमिका इतनी प्रभावशाली हो गई है कि आम नागरिक खुद को असहाय महसूस कर रहा है।

मिली जानकारी के अनुसार, प्रॉपर्टी बेचने वाले लोगों को अक्सर उनकी संपत्ति की वास्तविक बाजार कीमत नहीं मिल पाती, जबकि खरीदारों को वही संपत्ति कई गुना अधिक कीमत पर खरीदनी पड़ती है। इस असंतुलन के चलते बाजार में पारदर्शिता की कमी और अव्यवस्था बढ़ती जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रॉपर्टी डीलर्स द्वारा कृत्रिम रूप से कीमतों को नियंत्रित करने और सीमित जानकारी उपलब्ध कराने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हो रही है। कई मामलों में यह भी देखा गया है कि बिचौलिये संपत्तियों को खुद खरीदकर बाद में ऊंचे दामों पर बेचते हैं, जिससे आम खरीदार के लिए विकल्प सीमित हो जाते हैं।

इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर राजस्व विभाग, नगर परिषद और महानगर निगम जैसे संस्थानों के साथ संभावित सांठगांठ के आरोप भी सामने आते रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन आम जनता के बीच इसको लेकर असंतोष स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

महानगरों में मल्टी-स्टोरी इमारतों के निर्माण के साथ-साथ प्रॉपर्टी का केंद्रीकरण कुछ बड़े निवेशकों और दलालों के हाथों में होता जा रहा है। इससे मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए घर खरीदना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है।

सरकार द्वारा रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता लाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं, जैसे कि नियामक प्राधिकरणों की स्थापना और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका प्रभाव सीमित नजर आता है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को मजबूत करने और सख्त निगरानी तंत्र लागू करने की आवश्यकता है, ताकि आम नागरिक को उचित मूल्य पर संपत्ति उपलब्ध हो सके और रियल एस्टेट क्षेत्र में संतुलन कायम रह सके।