/चलो गाँव की ओर अभियान – राजस्थान में सहज योग और सहज कृषि की अलख

चलो गाँव की ओर अभियान – राजस्थान में सहज योग और सहज कृषि की अलख

जयपुर, 10 अक्तूबर
हिमनयन न्यूज/ ब्यूरो/वर्मा।

परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी के अनुग्रह और आशीर्वाद से प्रारंभ हुआ “चलो गाँव की ओर अभियान” पूरे भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में सहज योग और सहज कृषि का संदेश पहुँचा रहा है।

यह अभियान 21 मार्च 2025 से आरंभ होकर अब तक गाँव-गाँव तक आत्मसाक्षात्कार (Self-Realisation) का अनुभव जन-जन तक पहुँचा चुका है।

राजस्थान में यह पवित्र कार्य सितंबर 2024 से निरंतर जारी है। अक्टूबर 2025 के मध्य तक अभियान टीम ने राज्य के 128 गाँवों में 65 कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किए, जिनमें लगभग 23,810 ग्रामीणों, किसानों और विद्यालयों के विद्यार्थियों को आत्मसाक्षात्कार का अनुभव कराया गया। यह कार्य राजस्थान ग्रामीण कृषि समन्वय टीम के नेतृत्व में किया जा रहा है।

वर्तमान में राज्यभर में 51 ग्रामीण सहज योग केंद्र सक्रिय हैं, जो 21 मार्च 2026 तक 103 केंद्रों के लक्ष्य की दिशा में अग्रसर हैं। इन केंद्रों को सहज योग और सहज कृषि की सामग्रियों से सुसज्जित किया गया है। अब तक 75 फ्लेक्स किट्स (सूक्ष्म प्रणाली चार्ट एवं सहज कृषि तकनीक गाइड) और 4,10,000 से अधिक पुस्तिकायेएँ व फोल्डर ग्रामीण जनों में वितरित किए जा चुके हैं।

सहज योग ध्यान के माध्यम से ईश्वरीय शक्ति से उत्पन्न चैतन्य स्पंदन को हाथों की हथेलियों और सिर के शीर्ष पर शीतल हवा के रूप में अनुभव किया जा सकता है।

इन सूक्ष्म कंपन का प्रभाव न केवल मनुष्य पर बल्कि प्रकृति पर भी शुद्धिकरण और पोषण के रूप में पड़ता है।

सहज कृषि के माध्यम से किसानों ने पाया है कि फसलों की उपज में वृद्धि, पौधों की वृद्धि में सुधार, रोग-कीटों से प्राकृतिक सुरक्षा, पशु उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार और दूध उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी जैसे लाभ प्राप्त हुए हैं।

सहज योग की स्थापना 1970 में परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी द्वारा मानव कल्याण और आत्मिक उत्कर्ष के उद्देश्य से की गई थी। यह एक सरल एवं प्राकृतिक विधि है, जिसके अभ्यास से मनुष्य को आत्मसाक्षात्कार प्राप्त होता है और उसके भीतर स्थित कुंडलिनी शक्ति का जागरण होता है। चिकित्सकीय शोधों ने भी सिद्ध किया है कि नियमित सहज योग ध्यान से तनाव, चिंता और मानसिक-शारीरिक रोगों में कमी आती है।

यह अभियान न केवल आध्यात्मिक उत्थान का प्रतीक है बल्कि ग्रामीण भारत के सतत विकास, कृषि में संतुलन और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का आधार भी बन रहा है।