/मनमोहन सिंह ‘दानिश’ की ग़ज़ल

मनमोहन सिंह ‘दानिश’ की ग़ज़ल

सोलन 26 दिसम्बर,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो/ वर्मा

गगन तो हर तरफ फैला दिखाई दे रहा यारो
ये परबत है मगर बौना दिखाई दे रहा यारो

जलाया घर किसी का है यहां फिर भीड़ ने देखो
तभी इतना बड़ा मज़मा दिखाई दे रहा यारो

पसीना वो बहाता है मशीनें वो चलाता है
वही मज़दूर तो भूखा दिखाई दे रहा यारो

गरीबों की ये बस्ती है कभी आ कर यहां देखो
यहां हर आंख में सहरा दिखाई दे रहा यारो

हमें उम्मीद है ‘दानिश’ किनारा हम भी पा लेंगे
हमें मौजों पे इक तिनका दिखाई दे रहा यारो

— मनमोहन सिंह ‘दानिश’

सहरा: रेगिस्तान
मौजें: समुद्र या पानी की लहरें