/समाज को सही दिशा देते हैं साहित्यकार – विक्रमादित्य सिंह

समाज को सही दिशा देते हैं साहित्यकार – विक्रमादित्य सिंह

हिमाचल पर आधारित सात पुस्तकों के लोकार्पण का ऐतिहासिक अवसर।

शिमला, 02 जनवरी ,
हिम नयन न्यूज़/ब्यूरो/ वर्मा

लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि साहित्यकार समाज को सही दिशा देने का कार्य करते हैं और उनकी रचनाएं समाज का दर्पण होती हैं। उन्होंने यह विचार नववर्ष के पहले दिन शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर सभागार में आयोजित पुस्तक लोकार्पण समारोह में व्यक्त किए।

इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश की संस्कृति, जनजातीय क्षेत्रों, लोक परंपराओं और मंदिरों पर आधारित कुल सात पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। इनमें प्रसिद्ध लेखक एस.आर. हरनोट की “मंदिर और लोक श्रुतियां” तथा “कुन्जोम”, सुदर्शन वशिष्ठ की “किन्नर कैलाश से मणिमहेश”, अजेय की “रोहतांग आर-पार” (तृतीय संस्करण), टाशी छेरिंग नेगी की “किन्नौर”, छेप राम की “संस्कृति के सात अध्याय” और अखिलेश पाठक की “देवभूमि की आत्मा” शामिल रहीं।

लोक निर्माण मंत्री ने लेखकों को बधाई देते हुए कहा कि साहित्य के माध्यम से लोक संस्कृति, भाषाएं, बोलियां, परंपराएं और रीति-रिवाज पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित और प्रसारित होते हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास को उसके वास्तविक स्वरूप में समाज के समक्ष लाने का कार्य निडर और ईमानदार लेखक ही करते हैं।

उन्होंने चिंता व्यक्त की कि सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव से युवाओं में पुस्तकों के प्रति रुचि कम हो रही है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि सोशल मीडिया का नियंत्रित और रचनात्मक उपयोग करते हुए पुस्तकों का नियमित पठन करें, क्योंकि गहन ज्ञान और गंभीर चिंतन पुस्तकों से ही संभव है।


विक्रमादित्य सिंह ने सुझाव दिया कि जयपुर और कसौली की तर्ज पर शिमला में भी लिटरेचर फेस्टिवल का आयोजन किया जाना चाहिए, ताकि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध साहित्यिक संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान मिल सके।

कार्यक्रम के दौरान सभी लेखकों ने अपनी-अपनी कृतियों की रचना-प्रक्रिया और उपयोगिता पर सारगर्भित विचार रखे। यह आयोजन हिमालय साहित्य, संस्कृति एवं पर्यावरण मंच तथा आधार प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।

समारोह का शुभारंभ गायक ओम प्रकाश द्वारा लोकगीत प्रस्तुति से हुआ।

मंच संचालन युवा कवि एवं आलोचक सत्यनारायण स्नेही ने किया, जबकि धन्यवाद प्रस्ताव वरिष्ठ शिक्षाविद् एवं लेखक जगदीश बाली ने प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर शिक्षा, भाषा एवं संस्कृति विभाग के सचिव राकेश कंवर, वरिष्ठ व युवा लेखक, साहित्य प्रेमी तथा अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।