/दवा उद्योग में गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में अहम प्रावधान – शेड्यूल-एम

दवा उद्योग में गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में अहम प्रावधान – शेड्यूल-एम

दवा उपभोक्ताओं ने उत्पादन मूल्य और विक्रय दरों में अंतर को भी कम करने की उठाई मांग।

शिमला, 4 जनवरी,
हिम नयन न्यूज़ /ब्यूरो/वर्मा

दवाइयों की उत्पादक लागत और रोगियों को मिलने वाले बिक्री मूल्य के बीच अंतर से आम उपभोक्ताओं को राहत दिलाने के साथ-साथ दवा उद्योग में गुणवत्ता, सुरक्षा और नियमों के प्रभावी अनुपालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स, 1945 के तहत लागू शेड्यूल-एम को एक अहम प्रावधान माना जा रहा है।

सरकार द्वारा इसके अंतर्गत औषधि निर्माण इकाइयों के लिए गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज (GMP) से जुड़े नियम लागू किए गए हैं, जिसका उपभोक्ताओं द्वारा भी स्वागत किया गया है।


याद रहे कि शेड्यूल-एम के तहत दवा निर्माण की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं, जिससे उपभोक्ताओं को मानक और सुरक्षित दवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। इन प्रावधानों के अंतर्गत दवा फैक्ट्रियों के भवन और लेआउट, मशीनरी व उपकरणों की गुणवत्ता, प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ की नियुक्ति, स्वच्छता व्यवस्था, गुणवत्ता नियंत्रण, दस्तावेज़ीकरण तथा नियमित निरीक्षण को अनिवार्य किया गया है।


मिली जानकारी के अनुसार सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाज़ार में उपलब्ध सभी दवाएं निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी उतरें और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से किसी भी स्तर पर समझौता न हो।


विशेषज्ञों की माने तो संशोधित शेड्यूल-एम को WHO-GMP मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है, जिससे भारतीय दवा उद्योग की वैश्विक साख और निर्यात क्षमता को भी मजबूती मिली है।

इसके साथ ही सूक्ष्म, लघु और मध्यम औषधि इकाइयों (MSME) को इन मानकों के अनुरूप ढलने के लिए आवश्यक समय सीमा और तकनीकी मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जा रहा है।


उपभोक्ताओं की माने तो स्वास्थ्य विभाग और औषधि नियंत्रण प्रशासन के द्वारा शेड्यूल-एम का सख्ती से पालन न करनेवाले केवल दवा उद्योग में अनुशासन और पारदर्शिता लाई जाएगी, बल्कि आम जनता को सुरक्षित, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

दवा उपभोक्ताओं ने सरकार से मांग की है कि शेड्यूल एम को सख्ती के साथ लागू करने के साथ दवा उत्पादन और विक्रय के अंतर को भी कम करने की दिशा में कदम उठाया जाना चाहिए।