मोटापे पर नियंत्रण को लेकर दिया गया जागरूकता का संदेश
चंडीगढ़ 10 जनवरी,
हिम नयन न्यूज़/ब्यूरो/ वर्मा
भारतीय डायटेटिक्स दिवस 2026 के अवसर पर PGIMER Chandigarh के डिपार्टमेंट ऑफ डायटेटिक्स एवं हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह दिवस प्रतिवर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है। वर्ष 2026 की थीम “Control of Obesity for Healthier India – An Action Call from Nutrition Science Professionals” रही।

थीम के अनुरूप आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य मोटापे के बढ़ते कारणों, उससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों तथा वजन प्रबंधन के प्रमाण-आधारित एवं व्यावहारिक उपायों पर जागरूकता प्रदान करना था।

कार्यक्रम का उद्घाटन डीन रिसर्च प्रो. संजय जैन ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि संतुलन और संयम किसी भी आहार पद्धति को सफलतापूर्वक अपनाने तथा स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखने की मूल कुंजी हैं।
कार्यक्रम में मेडिकल सुपरिंटेंडेंट एवं विभागाध्यक्ष (हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन) प्रो. विपिन कौशल ने विशिष्ट अतिथि के रूप में भाग लिया। उन्होंने भोजन संबंधी चयन में ‘वोकल फॉर लोकल’ को अपनाने पर बल दिया। इस अवसर पर हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन विभाग के एएमएस प्रो. अशोक कुमार भी उपस्थित रहे।

कार्यशाला के दौरान चीफ डाइटीशियन एवं विभागाध्यक्ष, डायटेटिक्स डॉ. नैन्सी सहनी ने अपने सहयोगी सदस्यों के साथ मिलकर फैकल्टी, एलाइड हेल्थ वर्कर्स एवं आम जनता को मोटापे की रोकथाम तथा उसके उलटाव (रिवर्सल) से जुड़े जीवनशैली और आहार संबंधी महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराया।
उन्होंने व्यवहारिक आहार परिवर्तन, सर्कैडियन रिद्म के अनुरूप भोजन, सजग भोजन आदतें तथा दीर्घकालिक वजन प्रबंधन के व्यावहारिक आहार पैटर्न पर विस्तार से प्रकाश डाला।
अन्य विशेषज्ञ वक्ताओं में सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश गुप्ता तथा एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. संजय भडाडा ने मोटापे के उपचार में सर्जिकल विकल्पों, जीवनशैली में बदलाव, औषधीय उपचार तथा मोटापे से जुड़े गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) जैसे मधुमेह, हृदय रोग एवं उच्च रक्तचाप के बढ़ते जोखिमों पर विस्तृत जानकारी दी।

कार्यक्रम को रोचक एवं प्रभावी बनाने के लिए डायटेटिक्स इंटर्न्स द्वारा एक संदेशात्मक स्किट भी प्रस्तुत की गई, जिसमें कार्यशाला की थीम को सशक्त रूप से दर्शाया गया। इस कार्यशाला में लगभग 250 प्रतिभागियों ने भाग लिया।










