तीन मरीजों को मिला नया जीवन।
चंडीगढ़ 12 जनवरी,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो /वर्मा
PGIMER Chandigarh ने वर्ष 2026 की पहली मृतक अंगदान (Deceased Organ Donation) प्रक्रिया को सफलतापूर्वक सम्पन्न कर एक मानवीय और चिकित्सकीय मिसाल कायम की है।

इस अंगदान के माध्यम से तीन गंभीर रूप से बीमार मरीजों को नया जीवन मिला।
इस अवसर पर प्रो. विवेक लाल, निदेशक, PGIMER चंडीगढ़ ने कहा कि वर्ष 2026 का पहला मृतक अंगदान यह दर्शाता है कि गहरे शोक के क्षणों में भी मानवता और करुणा जीवित रहती है। उन्होंने अंगदाता के परिवार के साहस की सराहना करते हुए कहा कि उनका यह निःस्वार्थ निर्णय कई जिंदगियों में हमेशा जीवित रहेगा।
अंगदाता हरपिंदर सिंह, आयु 40 वर्ष, निवासी नूरपुर बेदी, आनंदपुर साहिब, जिला रूपनगर (पंजाब) थे, जो सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें 6 जनवरी 2026 को PGIMER चंडीगढ़ में भर्ती किया गया और वेंटिलेटर पर रखा गया।
गहन चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद उनकी स्थिति बिगड़ती गई और 9 जनवरी 2026 को ट्रांसप्लांटेशन ऑफ ह्यूमन ऑर्गन्स एंड टिश्यूज़ एक्ट (THOTA) के तहत उन्हें ब्रेन स्टेम डेड घोषित किया गया।
गहन व्यक्तिगत शोक के बीच अंगदाता की पत्नी ने अंगदान की सहमति देकर अद्वितीय साहस और संवेदनशीलता का परिचय दिया।

अंगदाता की दोनों किडनियां PGIMER चंडीगढ़ में प्रत्यारोपित की गईं, जिससे अंतिम चरण की किडनी बीमारी से पीड़ित दो मरीजों को नया जीवन मिला। वहीं, फेफड़ों को ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से Sir H. N. Reliance Foundation Hospital and Research Centre भेजा गया, जहां उनका सफल प्रत्यारोपण किया गया।
अंगदाता की पत्नी नीतू कुमारी ने कहा कि उनके पति की कमी कभी पूरी नहीं हो सकती, लेकिन यह जानकर उन्हें संबल मिलता है कि उनके अंग किसी और को जीवन देने में सहायक बने।
इस अवसर पर प्रो. विपिन कौशल, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, विभागाध्यक्ष (अस्पताल प्रशासन) एवं नोडल अधिकारी, ROTTO (नॉर्थ) ने कहा कि यह मामला देश में अंग प्रत्यारोपण व्यवस्था, अंतरराज्यीय समन्वय, नैतिक चिकित्सा पद्धति और संवेदनशील काउंसलिंग की सशक्त मिसाल है।
वर्ष 2026 का यह पहला मृतक अंगदान समाज के लिए एक प्रेरणादायी संदेश है कि अंगदान मृत्यु के बाद भी जीवन का उजाला बन सकता है।
PGIMER चंडीगढ़ ने एक बार फिर आमजन से अंगदान को एक महान और जीवनदायी कार्य के रूप में अपनाने की अपील की है।










