/व्यंग्य # बेचारा कंस और उसका ‘सेल्फ डिफेंस’

व्यंग्य # बेचारा कंस और उसका ‘सेल्फ डिफेंस’

सोलन 17 जनवरी,
हिम नयन न्यूज/ ब्यूरो/मनमोहन सिंह

अब कंस क्या करता? खुद को ज़िंदा रखने के लिए उसने देवकी के सभी पुत्रों को मार डाला। अरे भाई उसने जो भी किया वह “सेल्फ डिफेंस” में किया। और आत्मरक्षा का अधिकार तो सभी को है। हमारा संविधान भी यह अधिकार हमे देता है।

यह बात अलग है कि भगवान कृष्ण फिर भी बच गए। और कहा जाता है कि जब जब धरती पर पाप बढ़ता है, मानवता का संहार होता है तो भगवान अवतार लेते हैं। पर वे केवल भारत में ही अवतरित होते हैं इजरायल, यूक्रेन, अफगानिस्तान, अमेरिका, वेनजुएला, पाकिस्तान, बांग्लादेश से उनका कोई नाता नहीं होता। उन देशों में यह काम लोगों को खुद ही करना पड़ता है।


अब बात हो रही थी भगवान के अवतार लेने की। हो सकता है आज भी किसी रूप में भगवान धरती पर आ चुके हों। तो सत्ता के लिए खतरा हो सकते हैं।

इन हालत में सत्ता को अपनी सुरक्षा तो करनी ही चाहिए, और वो ऐसा कर भी रही है। उसे जिस पर भी संदेह होता है कि वह अवतार हो सकता है उसे जेल में डाल देती है। इसी तरह के न जाने कितने युवा बिना मुकदमा चलाए जेल में रखे गए हैं।

समस्या यह है कि अगर मुकद्दमा चलेगा तो सबूत देने होंगे, अब सरकार सबूत ढूंढे या कोई और काम करे। वैसे भी इनमें से अधिकतर लोगों को अदालतें बरी कर देती हैं ।

इसलिए देश हित में ज़रूरी है कि इन्हें बिना आरोप तय किए जेल में ही रखा जाए। और अगर जेल में न भी डाले तो सरकार एफ आई आर तो दर्ज करा ही दे। आखि़र सेल्फ डिफेंस तो ज़रूरी है।

अभी उत्तर प्रदेश में 14 साल के एक बालक पर सत्ता को शक हुआ कि वह बेरोजगारी, नौकरी, मंहगाई जैसे खतरनाक मुद्दों को उठा रहा है तो प्रशासन ने सेल्फ डिफेंस लेते हुए उस पर एफ आई आर दर्ज करा दी।
सही है अपनी सुरक्षा ज़रूरी है ।

अगर इतनी छोटी सी उम्र में उसका ये हाल है तो बड़ा हो कर तो न जाने कैसे कैसे सवाल करेगा। हो सकता है उन कर्जों की छानबीन करने लगे जो बैंकों ने कुछ ‘गरीब’ पूंजीपतियों को दे रखे हैं। फिर वे कर्ज़ जो उनसे हमें वापस भी नहीं लेने।

अब जो बच्चा इतनी छोटी उम्र में इतने खतरनाक सवाल उठा रहा है वह बाद में क्या नहीं करेगा।

इसलिए उसके सवालों को अभी से दबा देना देश हित में ज़रूरी है। यह सत्ता की मजबूरी है। अब आम लोग क्या जाने बेचारे राज नेताओं की समस्याएं।

आज के युग में हमारे नेताओं की वही मजबूरी है जो उस युग में कंस की रही होगी। किसी शायर ने सही कहा है:

” कुछ तो मजबूरियों रही होगी
यूंही कोई बेवफा नहीं होता “