शिमला 17 जनवरी,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो/वर्मा
हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार के गठन के बाद प्रदेश की जनता से किए गए वायदों को लेकर सरकार लगातार कटघरे में खड़ी नजर आ रही है।
सरकार के भीतर और बाहर जो राजनीतिक बवाल खड़ा हुआ है, वह थमने का नाम नहीं ले रहा।
प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की हाल ही में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से हुई मुलाकात के बाद बदले हुए तेवर इस ओर इशारा कर रहे हैं कि घटनाक्रम हाईकमान के दिशा-निर्देशों के तहत आगे बढ़ रहा है।

पार्टी के भीतर यह साफ संदेश जाता दिख रहा है कि कमजोर पड़ने वालों के साथ खड़ा होने की हिम्मत अब शायद ही कोई कर पाए, खासकर तब जब सरकार के अभी दो वर्ष शेष हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि सत्ता का सुख तभी तक भोगा जा सकता है, जब तक हाईकमान और सरकार से मधुर संबंध बने रहें। दूसरी ओर, प्रदेश की जनता सरकार के कामकाज से संतुष्ट नजर नहीं आ रही है, लेकिन सत्ता की मलाई कैसे खाई जाए—यह सवाल सत्ता पक्ष के भीतर सबसे अहम बना हुआ है।
कांग्रेस पार्टी की प्रदेश राजनीति में मचा यह बवाल फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा।
विपक्षी दल पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और मौका मिलते ही सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। वहीं सत्ता पक्ष में जारी खींचतान का लाभ प्रशासनिक अधिकारी भी उठाते नजर आ रहे हैं, जिससे शासन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि हिमाचल की राजनीति में मचा यह तूफान आखिर कब थमेगा, या फिर आने वाले समय में यह और तेज़ होने वाला है।









