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हिमाचल: क्या कांग्रेस के 6 विधायकों की जाएगी सदस्यता ?

सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच करेगी सुनवाई

शिमला, 22 जनवरी
हिम नयन न्यूज़ / ब्यूरो / वर्मा

हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी ड्रामा देखने को मिल सकता है। प्रदेश सरकार में शामिल छह पूर्व मुख्य संसदीय सचिवों (सीपीएस) की विधानसभा सदस्यता को लेकर मामला अब सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष पहुंचेगा।


सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की, जिसमें न्यायमूर्ति दीपांकर दत्त और न्यायमूर्ति जायमाला बागची भी शामिल रहे। इस दौरान भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती की ओर से उनके अधिवक्ता ने मामले की शीघ्र सुनवाई का आग्रह किया, जिस पर अदालत ने तीन जजों की बेंच गठित कर मामले को सूचीबद्ध करने का निर्णय लिया।


हाई कोर्ट ने दिए थे सीपीएस पद से हटाने के आदेश
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने वर्ष 2024 में आए हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

हाई कोर्ट ने कल्पना देवी और भाजपा विधायकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए तत्कालीन सीपीएस
किशोरी लाल, सुंदर सिंह ठाकुर, मोहन लाल ब्राक्टा, राम कुमार चौधरी, आशीष बुटेल और संजय अवस्थी को उनके पद से हटाने के आदेश दिए थे।


कांग्रेस विधायकों की सदस्यता पर मंडरा रहा संकट
यदि सुप्रीम कोर्ट का फैसला कांग्रेस के इन छह विधायकों के खिलाफ जाता है और उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त होती है, तो इसका सीधा असर राज्य की सियासी गणित पर पड़ेगा। वर्तमान में हिमाचल विधानसभा में कांग्रेस के 40 विधायक हैं। छह की सदस्यता जाने पर यह संख्या घटकर 34 रह जाएगी।


वहीं भाजपा के पास 28 विधायक हैं। ऐसे हालात में राजनीतिक उठापटक और तोड़फोड़ की अटकलें भी तेज हो सकती हैं। हालांकि गणितीय रूप से देखें तो 68 सदस्यीय विधानसभा में छह सीटें रिक्त होने के बाद सदन की संख्या 62 रह जाएगी, जिसमें बहुमत के लिए 32 विधायकों की आवश्यकता होगी। इस स्थिति में भी कांग्रेस सरकार बहुमत में बनी रहेगी।



मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को तय की गई है। अब प्रदेश की राजनीति और सरकार का भविष्य काफी हद तक सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगा। फिलहाल पूरे राज्य की निगाहें शीर्ष अदालत के निर्णय पर टिकी हुई हैं।