शिमला 15 फरवरी,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो/ वर्मा
आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक मोबाइल स्क्रीन पर बि ताया जाने वाला समय लगातार बढ़ रहा है। जानकारी, मनोरंजन और संवाद का यह माध्यम जितना उपयोगी है, उतना ही खतरनाक भी बनता जा रहा है, जब इसका उपयोग सीमा से अधिक होने लगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग लोगों को मानसिक तनाव, चिंता और अकेलेपन की ओर धकेल रहा है। खासकर युवाओं और बच्चों में इसका प्रभाव अधिक दिखाई दे रहा है।
लाइक और कमेंट की होड़ ने आत्मविश्वास को आभासी मानकों से जोड़ दिया है, जिससे वास्तविक जीवन की खुशियों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार लगातार स्क्रीन पर समय बिताने से ध्यान केंद्रित करने की क्षमता घटती है, नींद प्रभावित होती है और पारिवारिक व सामाजिक संबंध कमजोर पड़ते हैं। कई लोग बिना जरूरत के भी हर कुछ मिनट में फोन चेक करने की आदत से ग्रस्त हो चुके हैं, जो डिजिटल लत का संकेत है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि सोशल मीडिया का संतुलित और सीमित उपयोग ही समाधान है। परिवारों को चाहिए कि वे बच्चों के स्क्रीन टाइम पर निगरानी रखें और उन्हें खेल, पढ़ाई तथा रचनात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित करें।
समय की मांग है कि हम सोशल मीडिया का उपयोग करें, लेकिन उसके मोहपाश में बंधकर अपने वास्तविक जीवन को प्रभावित न होने दें। डिजिटल दुनिया के साथ संतुलन बनाकर ही स्वस्थ और खुशहाल समाज का निर्माण संभव है।







