सोलन 20 फरवरी,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो/मनमोहन सिंह
आज सवेरे सवेरे जब मैंने अपने दोस्त मोहिंदर नाथ सोफत का ब्लॉग पढ़ा तो न जाने क्यों मुझे किसी शायर का लिखा उपरोक्त शेर याद आ गया।
अब एक नायब तहसीलदार और लगभग पूरा दफ्तर छुट्टी ले कर राजस्थान घूमने चला गया तो हंगामा क्यों? अरे साहब अगर वे दफ्तर में होते तो भी किस काम के थे।
हमारे यहां सदियों से दफ्तरों में जिस तरह से काम होते हैं सब को पता है।
बाबूजी अपना कोट कुर्सी पर टांग कर शिमला से अर्की घूम आते हैं। किसी की मजाल है जो बाबू जी से पंगा ले सके। जो उनसे सवाल करे उसकी फाइल ऐसी जगह फंसा देते हैं कि आप ढूंढते रह जाओगे।
अब ये जो “मास कैजुअल लीव” लेकर राजस्थान भ्रमण पर निकले थे अगर ये न भी गए होते तो कौन सा काम करना था?
राजस्व विभाग शायद इस महान देश का एक मात्र ऐसा महान विभाग है जिसकी गलती का खामियाजा उससे पीड़ित व्यक्ति को भुगतना पड़ता है।
अगर आपकी संपत्ति के रिकॉर्ड में आदरणीय पटवारी साहब ने जानबूझ कर या अनजाने में लिख दिया कि इस संपत्ति पर बैंक का कर्जा है तो फिर आप ये खुद साबित करते रहें कि कर्जा है कि नहीं। उसके लिए जितनी औपचारिकताएं पूरी करने पड़ेंगी कि आदमी का दम निकल जाए।
हो सकता है हमारे ये सैलानी किसी अध्ययन के लिए गए हों कि राजस्थान में ज़मीनें कैसे मापी जाती हैं। या दोनों प्रदेशों के राजस्व विभाग आपस में कैसे तालमेल बिठा सकते हैं। या फिर यह जानने की वहां रिश्वत के रेट कहीं हिमाचल प्रदेश से अधिक तो नहीं। जिस तरह पूरे देश में एक समान जीएसटी लागू करने का दावा है उसी तरह पूरे देश के राजस्व विभागों में रिश्वत की एक समान दरें लागू करने की कोशिश चल रही हो। अब इतनी गहरी बातें हम जैसे साधारण मनुष्य कैसे जान सकते हैं?
खैर इस मामले की जांच बड़े अफसरों को सौंपी गई है। जहां पूरी तहकीकात करके इन कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारियों को बचाने का कोई न कोई रस्ता वे निकाल ही लेंगे। इसलिए चिंता की कोई बात नहीं।
ये सभी फिर से इसी दफ्तर नज़र आएंगे ऐसा मेरा अनुभव और विश्वास कहता है। जैसे कहा जाता है कि जब आप किसी चीज़ की चाहत पूरी शिद्दत से करते हैं तो उसे पूरा करने में पूरी कायनायत आपकी मदद करती है।
इसी तरह जब कोई कर्मचारी कहीं फंस जाए तो पूरी कर्मचारी बिरादरी उसे बचाने के लिए पूरी शिद्दत से जुट जाती है।










