शिमला 28 मार्च,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो/ वर्मा
भाजपा नेता एवं विधायक विपिन सिंह परमार ने विधानसभा में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के बजट पर चर्चा के दौरान प्रदेश सरकार की नीतियों और व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष स्वास्थ्य बजट कुल बजट का केवल 5.83% है, जो लगभग ₹2800–3000 करोड़ है और इसे उन्होंने अपर्याप्त बताया।
परमार ने कहा कि सरकार उन्नत तकनीकों की बात कर रही है, लेकिन अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर डॉक्टर होने के बावजूद ऑपरेशन थिएटर नहीं हैं और मशीनें होने के बावजूद टेक्निकल स्टाफ के अभाव में उनका उपयोग नहीं हो पा रहा है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में लैब टेक्निशियन, रेडियोग्राफर और अन्य तकनीकी स्टाफ की भारी कमी है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। साथ ही, कई अस्पतालों में उपकरण उपलब्ध होने के बावजूद विशेषज्ञों की कमी के कारण उनका उपयोग नहीं हो रहा।
विपिन परमार ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में पर्याप्त भर्तियां नहीं होने से स्थिति और खराब हुई है। उन्होंने आर्थिक सर्वे का हवाला देते हुए बताया कि प्रदेश में 835 स्वास्थ्य संस्थानों और 16,699 बेड के बावजूद स्टाफ की कमी बनी हुई है।
उन्होंने हिमकेयर और आयुष्मान भारत योजनाओं का समर्थन करते हुए कहा कि इनसे लाखों लोगों को लाभ मिला है, लेकिन इन्हें बंद करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही, उन्होंने मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों पर ₹400 करोड़ से अधिक की लंबित देनदारियों का मुद्दा भी उठाया।

परमार ने दवाइयों की गुणवत्ता और रोबोटिक सर्जरी जैसे महंगे उपकरणों की खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में दिखावे के बजाय बुनियादी ढांचे को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने सरकार से पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का आग्रह किया।









