/“सहज योग में निस्वार्थता की कमी पर गहराता चिंतन”

“सहज योग में निस्वार्थता की कमी पर गहराता चिंतन”

शिमला 30 मार्च/हिम नयन न्यूज़ ब्यूरो
✍️ संपादकीय

श्री माता जी श्री निर्मला देवी द्वारा स्थापित सहज योग, जिसे आत्मिक शांति और आत्मसाक्षात्कार का सहज मार्ग है, आज एक गंभीर आत्ममंथन के दौर से गुजरता दिखाई दे रहा है।

श्री माता जी निर्मला देवी द्वारा स्थापित सहज योग आज का महायोग बनाने के पथ पर चलते साधकों के बीच यह विचार उभरकर सामने आया है कि सहज योग किसी भी प्रकार की जबरदस्ती या प्रलोभन से नहीं, बल्कि श्री माता जी की असीम कृपा और मानव की आंतरिक इच्छा से ही प्राप्त किया जा सकता है।

सहज योग की संस्थापक श्री माता जी निर्मला देवी ने भी स्पष्ट रूप से कहा था कि “आत्मसाक्षात्कार एक जीवंत प्रक्रिया है, जिसे किसी पर थोपा नहीं जा सकता।”

उनका यह भी संदेश है कि सहज योग में आने वाला प्रत्येक साधक अपनी शुद्ध इच्छा (Pure Desire) से ही इस मार्ग पर आगे बढ़े, न कि किसी बाहरी आकर्षण या लाभ के कारण।

वर्तमान समय में यह देखने को मिल रहा है कि कई लोग सहज योग से जुड़ तो रहे हैं, लेकिन उनका ध्यान आध्यात्मिक उन्नति से अधिक सांसारिक अपेक्षाओं और प्रलोभनों की ओर रहता है।

परिणामस्वरूप, वे सहज योग की गहराई को समझने के बजाय केवल बाहरी गतिविधियों तक सीमित रह जाते हैं।

इस स्थिति के कारण सामूहिक कार्यक्रमों में सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए बार-बार आग्रह करना पड़ता है, जबकि निस्वार्थ भाव से सेवा करने वाले साधक बहुत कम दिखाई देते हैं। ऐसे साधकों को पहचानने और प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है, जो बिना किसी अपेक्षा के सहज योग के कार्यों में समर्पित रहते हैं।

श्री माता जी निर्मला देवी ने यह भी कहा था कि सहज योग में दिखावा, कृत्रिमता और बाहरी आडंबर का कोई स्थान नहीं है, बल्कि यह एक आंतरिक अनुभव है, जिसे साधना और आत्मचिंतन के माध्यम से ही गहराई से समझा जा सकता है।

आज आवश्यकता है कि सहज योग से जुड़े सभी साधक आत्मचिंतन करें और यह समझें कि वे इस मार्ग पर क्यों हैं—क्या वे वास्तव में आत्मिक विकास के लिए प्रयासरत हैं या केवल बाहरी गतिविधियों में उलझे हुए हैं।

अंततः, सहज योग की वास्तविक पहचान निस्वार्थ सेवा, समर्पण और आंतरिक शुद्धता में ही निहित है। यदि साधक इन मूल सिद्धांतों को अपनाते हैं, तभी यह “महायोग” अपने वास्तविक स्वरूप में समाज को दिशा देने में सक्षम होगा।


कुंडलिनी जागरण (आत्म साक्षात्कार ) प्राप्त करने के लिए बिना किसी जाती, धर्म और लिंग भेद के निशुल्क प्राप्त किया जा सकता है जिस के लिए कोई भी सत्य का साधक टोल फ्री नंबर 18002700800
या www//sahajyoga.com.in पर संपर्क कर सकता है।

संपादक
हिम नयन न्यूज़