/व्यंग्य # हमारी दिल्ली पुलिस और पिटाई का ठेका

व्यंग्य # हमारी दिल्ली पुलिस और पिटाई का ठेका

सोलन 19 फरवरी
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो/मनमोहन सिंह

लोग कहते हैं पुलिस बहुत ज़ालिम होती है। थाने में आरोपियों और अपराधियों को पीटती है। गाली गलौज करती है। पर अब पुलिस का चरित्र बदल गया है। अब उसने यह सब काम ठेके पर दे दिया है। कब तक बेचारे पुलिस वाले लोगों की बद्दुआएं अपने सर लेते। इस पाप से बचने के लिए इन जां बाज पुलिस वालों ने अब यह काम गुंडे मवालियों को सौंप दिया है।

पुलिस द्वारा मार पीट करने के लिए अधिकृत ये चरित्रवान मवाली, अपराधियों और चोर उच्चकों और बलात्कारियों को नहीं अपितु अपना सारा पौरुष शिकायत दर्ज करने आए गरीबों और मजलूमों को दिखाते हैं और अगर शिकायत करने वाली कोई युवा महिला हो तो फिर तो उनकी पौ बारह। और हमारी पुलिस ऐसे पाप से दूर, हथेली पर तंबाकू रगड़ती तमाशा देखती रहती है।

अब कोई यह नहीं कह सकता कि पुलिस ने थाने में किसी मुल्ज़िम के साथ मार पीट या गली गलौज किया।
पिछले दिनों दिल्ली में छात्राओं के साथ थाने में जो कुछ सड़क छाप गुंडों ने किया उससे तो यही समझ में आया है।

वैसे वे छात्राएं भूल गईं कि साहब के खिलाफ आवाज़ उठाना इस “लोकतंत्र” में अपराध है। अभी तो गुंडों ने कपड़े फाड़ने और बलात्कार करने की धमकी दी थी अगर कर भी लिया होता तो क्या कर लेते।

इस घटना से साफ पता चलता है कि हमारी पुलिस का चरित्र बदल रहा है। देश में जब हर कामअब ठेके पर दिया जाने लगा है तो अब अगर थाने में पिटाई और गाली गलौज का ठेका गुंडे मवालियों के मिलने लगा है तो इसमें बुराई क्या?


वैसे तो निजी वित्त कंपनियों और बैंकों ने तो कर्जा वसूली के लिए पहले से ही ऐसे गुंडों की मदद लेनी शुरू कर रखी है। किराए के हत्यारे भी होते हैं। उनके अपने रेट हैं। पैसा दो किसी को मरवा दो।


जो भी हो पर अब कोई यह नहीं कह सकता कि पुलिस ने थाने में किसी को पीटा।