सोलन 14 अप्रैल,
हिम नयन न्यूज़ /ब्यूरो/ मनमोहन सिंह
भारतीय संगीत जगत की महान स्वर कोकिला आशा भोसले के निधन से पूरा देश शोक में डूब गया है। उनकी विदाई के साथ एक सुनहरा युग भी मानो समाप्त हो गया, जिसने दशकों तक अपनी मधुरता से करोड़ों दिलों को छुआ।
“न हाथ थाम सके न पकड़ सके दामन,
बड़े करीब से उठ कर चला गया कोई।”
आशा ताई, जिनकी आवाज़ में कभी शरारत, कभी नज़ाकत और कभी गहरी भावनाएं झलकती थीं, भारतीय सिनेमा और संगीत का एक अनमोल अध्याय थीं। चाहे आधुनिक गीत हों या कैबरे डांस नंबर—उनकी आवाज़ हर अंदाज़ में ढल जाती थी।
उनके दौर में Kundan Lal Saigal, Noor Jehan, Mohammed Rafi, Kishore Kumar, Lata Mangeshkar जैसे दिग्गज कलाकारों की लंबी श्रृंखला रही, लेकिन आशा भोंसले की बहुमुखी प्रतिभा और नशीली आवाज़ ने उन्हें अलग पहचान दी।
फिल्म इजाज़त के प्रसिद्ध गीत “मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है” के पीछे की कहानी उनकी संगीत समझ को भी दर्शाती है। जब R. D. Burman ने शुरुआत में इस नज़्म को नकार दिया, तब आशा जी ने अपनी धुन से उसे जीवंत कर दिया—और वही गीत आज अमर हो गया।
इस मौके पर Sahir Ludhianvi की पंक्तियां याद आती हैं:
“कल और आयेंगे नगमों की खिलती कलियां चुनने वाले,
मुझसे बेहतर कहने वाले, तुमसे बेहतर सुनने वाले।”
हालांकि यह विनम्रता का भाव है, लेकिन सच्चाई यही है कि आशा ताई जैसी आवाज़ और कला का संगम शायद ही फिर देखने को मिले।
आशा ताई का जाना सिर्फ एक कलाकार का जाना नहीं, बल्कि भारतीय संगीत के स्वर्णिम अध्याय का अंत है।
हिम नयन न्यूज की ओर से भी भावपूर्ण श्रद्धांजलि।








