शिमला, 19 फरवरी,
हिम नयन न्यूज़/ब्यूरो/ वर्मा
हिमाचल प्रदेश विधानसभा की कार्यवाही गत दिवस बुधवार को सुबह 11 बजे प्रश्नकाल से शुरू हुई, जिसमें भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, अधूरे विकास कार्य, स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और राजस्व घाटा अनुदान जैसे अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। कार्यवाही के दौरान कई बार सदन का माहौल गर्म रहा और स्पीकर को हस्तक्षेप करना पड़ा।
प्रश्नकाल में विभागीय जवाबदेही पर जोर
प्रश्नकाल के दौरान सदस्यों ने विभिन्न विभागों में लंबित मामलों, विकास कार्यों में देरी और प्रशासनिक लापरवाही के मुद्दे उठाए। कई सदस्यों ने आरोप लगाया कि जनता से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी हो रही है और जिम्मेदार अधिकारियों पर समय पर कार्रवाई नहीं होती। सरकार ने जवाब देते हुए कहा कि संबंधित विभागों को जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।

भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही का मुद्दा उठा
सदन में भ्रष्टाचार का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। सदस्यों ने आरोप लगाया कि कुछ विभागों में अधिकारियों की लापरवाही और उदासीनता के कारण जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने इसे गंभीर विषय बताते हुए जांच के निर्देश जारी करने की बात कही।
युवाओं की बेरोजगारी और भर्ती प्रक्रियाओं में आयु सीमा को लेकर भी चर्चा हुई। एक सदस्य ने कहा कि कई भर्तियों में आयु सीमा अधिक होने से युवाओं को अवसर नहीं मिल पाता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि संघ लोक सेवा आयोग की सेवाओं में न्यूनतम आयु 21 वर्ष और योग्यता स्नातक है, इसलिए राज्य की भर्तियों में भी समान व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए। सरकार ने इस मुद्दे को महत्वपूर्ण बताते हुए विभागीय स्तर पर विचार करने का आश्वासन दिया।
एक विधायक ने अपने क्षेत्र की सड़क की खराब स्थिति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सड़क खराब होने से 25 से 30 गांव प्रभावित हो रहे हैं और लोगों को पलायन तक करना पड़ रहा है। सरकार ने संबंधित विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर चर्चा के दौरान एक अधूरे सिविल अस्पताल के निर्माण का मामला सामने आया। सदस्यों ने कहा कि फंड की कमी के कारण अस्पताल का निर्माण लंबे समय से रुका हुआ है। सरकार ने अस्पताल निर्माण कार्य पूरा करने के लिए संसाधनों की व्यवस्था पर विचार करने का आश्वासन दिया।
एक छोटी सिंचाई योजना का मुद्दा भी सदन में उठा, जिससे 10 से 15 गांवों को लाभ मिल सकता है। सरकार ने योजना को पूरा करने के लिए विभाग को निर्देश देने की बात कही।
सदन में केंद्र से मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को लेकर भी चर्चा हुई। सदस्यों ने कहा कि इसमें कमी से राज्य की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो सकती है। सरकार ने केंद्र से वित्तीय सहायता जारी रखने की मांग उठाने का भरोसा दिलाया।
कार्यवाही के दौरान कई बार हंगामा हुआ, जिसके बाद स्पीकर ने निर्देश दिया कि सदन की कार्यवाही के दौरान मोबाइल से वीडियो रिकॉर्डिंग प्रतिबंधित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड में केवल मुख्यमंत्री का बयान ही शामिल किया जाएगा।
बैठक शाम तक चली और विभिन्न जनहित मुद्दों पर चर्चा के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी










