/‘एक जंग नशे के खिलाफ़’

‘एक जंग नशे के खिलाफ़’

आखिर डोप टेस्ट से गुरेज़ क्यों?

सोलन 3 अगस्त,
हिम नयन न्यूज/ ब्यूरो/
साभार मनमोहन सिंह

‘जियो ज़िंदगी’ ने शुरु से ही मांग की है कि अगर हमें नशे के खिलाफ जंग जीतनी है तो डोप टेस्ट को अनिवार्य किया जाना ज़रूरी है।

हिमाचल प्रदेश सरकार ने इस के बारे में एक कदम तो उठाया है पर उसमें भी झिझक है। प्रदेश की पुलिस सेवाओं में भर्ती के समय डोप टेस्ट को लागू किया गया है पर मेरी जानकारी के मुताबिक बाकी स्थानों पर इसे लागू करने से सरकार गुरेज़ कर रही है।

यह उसकी राजनैतिक मजबूरी हो सकती है, पर जब प्रदेश का नौजवान नशे की भेंट चढ़ रहा हो सभी को राजनैतिक नफा नुकसान से ऊपर उठ कर सोचना चाहिए।

नशे, खास तौर कर चिट्टे का व्यापार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक समानांतर अर्थव्यवस्था का रूप ले चुका है। पंजाब में तो कई बड़े नेताओं पर भी उंगलियां उठ रही हैं। मतलब यह कि इसमें इतना पैसा और मुनाफा आ गया है कि बड़े बड़े लोग इसमें भागीदार बन गए हैं।

आजकल एक छोटी सी सिगरेट पान की दुकान चलाने वाला भी इस ज़हर का विक्रेता हो सकता है। इस व्यापार पर नकेल कसने का एक ही तरीका है कि इसके ग्राहकों की गिनती पर नकेल कसी जाए। उसके लिए लोगों को जागरूक करने के साथ साथ इसके सौदागरों को भी पकड़ना ज़रूरी है।

डोप टेस्ट का मतलब है कि किसी भी सरकारी नौकरी में गलती से भी ऐसा व्यक्ति न आ सके जो नशे का आदि हो। इसी तरह किसी कॉलेज या विश्वविद्यालय में कोई छात्र या अध्यापक ऐसा न आ सके जो खुद इसका सेवन करता हो। जिस तरह आजकल किसी भी आपरेशन से पूर्व डॉक्टर्स मरीज़ के खून का टेस्ट करके यह जांच करते हैं कि कहीं वह मरीज़ हैपेटाइटस बी, सी या एच आई वी पॉजिटिव तो नहीं है।

इसी के साथ ही यह टेस्ट भी हो सकता है कि कहीं वो नशे का आदि तो नहीं।

यहां तक कि शादी के लिए कुंडली मिलाने से पहले दूल्हा दुल्हन का डोप टेस्ट नशे के इस भयानक व्यापार पर लगाम लगाने में कारगर साबित होगा।

हो सकता है ‘जियो ज़िंदगी’ का यह सुझाव कुछ लोगों का अटपटा लगे पर जब बात युवाओं की जिंदगी की हो तो सब सही है।