शिमला 4 जून,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो/ संवाददाता
सहजयोग की संस्थापक प. पू. श्री माताजी निर्मला देवी ने विभिन्न अवसरों पर माथे पर कुमकुम (बिंदी) लगाने के आध्यात्मिक एवं सूक्ष्म महत्व को विस्तार से समझाया है।
उनके अनुसार बिंदी केवल एक परंपरा या श्रृंगार का प्रतीक नहीं, बल्कि आज्ञा चक्र की सुरक्षा और आध्यात्मिक जागृति का महत्वपूर्ण माध्यम है।

श्री माताजी ने कहा कि मनुष्य का ध्यान प्रायः विचलित रहता है, जिसके कारण बाहरी नकारात्मक प्रभाव सूक्ष्म तंत्र में प्रवेश कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि ललाट पर लगाई जाने वाली बिंदी आज्ञा चक्र की रक्षा करती है और साधक को अनावश्यक बाधाओं एवं नकारात्मक प्रभावों से बचाने में सहायक होती है।
अपने विभिन्न प्रवचनों में उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि बिंदु या बिंदी का संबंध पंचमहाभूतों—प्रकाश, वायु, जल, अग्नि और पृथ्वी—से है तथा इसके माध्यम से इन तत्वों की सूक्ष्म कार्यप्रणाली सक्रिय होती है।

श्री माताजी के अनुसार, जब कुमकुम को ललाट पर आज्ञा चक्र के स्थान पर लगाया जाता है, तो यह चक्र जागृत होने लगता है और कुंडलिनी शक्ति के उर्ध्वगमन में सहायता मिलती है। उन्होंने इसे आध्यात्मिक उन्नति और आंतरिक चेतना के विकास से जोड़ा।
उन्होंने साधकों को ध्यान के दौरान आंखें खुली रखने की भी सलाह दी, जिससे आज्ञा चक्र संतुलित रहता है और चैतन्य का प्रवाह अधिक प्रभावी ढंग से अनुभव किया जा सकता है।

सहजयोग साधकों के लिए श्री माताजी के ये संदेश आध्यात्मिक साधना, चक्रों के संतुलन और आत्मसाक्षात्कार की दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। सहज योगा द्वारा आत्म साक्षात्कार के लिए निशुल्क सेवा हेतु बिना किसी धर्म, जाती, रंग और लिंग भेद के टोल फ्री नंबर पर 18002700800 अथवा संवाददाता के नंबर 9418450853 पर संपर्क कर सकते है ।श्री माता जी की कृपा से आप भी निशुल्क घर बैठे आत्म साक्षात्कार
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